बाघों की गणना का पहला चरण शुरू, टाईगर प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों को दी जा रही है ट्रेनिंग

पलामू: 2022 में भारत के सभी बाघ अभायरण्य में बाघों की गिनती पूरा करते हुए, सेंसस जारी करना है। बाघों की गणना का पहला चरण शुरू हो गया है जिसमें टाईगर प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों को ट्रेनिंग देने का काम शुरू हो गया है। झारखंड से इस ट्रेनिंग के लिए पलामू टाइगर रिजर्व के निदेशक कुमार आशुतोष समेत 3 अधिकारी देहरादून के राजाजी नेशनल पार्क में भेजा गया है, जो 26 अगस्त तक हिस्सा लेंगे। प्रशिक्षण के बाद यही 3 अधिकारी झारखंड के वन विभाग के अधिकारियों को बाघों की गणना को लेकर ट्रेनिंग देंगे।
देश में कुल 52 टाईगर प्रोजेक्ट विभिन्न राज्यों में बाघों को संरक्षित करने का दायित्व संभाल रही है। वर्ष 2021 में एक साथ पूरे देश में बाघों की गणना शुरू होगी, जिसका सेंसस रिपोर्ट वर्ष 2022 में NTCA के द्वारा जारी किया जायेगा।वर्ष 2018 में सेंसस रिपोर्ट के अनुसार पलामू टाईगर रिजर्व एरिया में एक भी बाघ नहीं था। लेकिन इन सभी के बीच फरवरी 2020 में बेतला नेशनल पार्क में एक बाघिन मृत अवस्था में मिली थी, जिसके बाद कई और बाघों के होने के कयास लगाए जा रहे हैं।
लोहरदगा इलाके में भी बाघ के मौजूदगी के सबूत मिले थे।पलामू टाईगर रिजर्व एरिया में ही सबसे पहले वर्ष 1932 में बाघों की गिनती शुरू हुई थी, 1026 वर्ग किलोमीटर के एरिया में फैले हुए इस एरिया में 226 वर्ग किलोमीटर में कोर एरिया का विस्तार है।1974 के सेंसस के अनुसार पलामू में 50 से अधिक बाघ थे, जबकी 2009 में वैज्ञानिक विधि से शुरू हुए गणना के अनुसार 8 बाघ होने की बात कही गई थी। जो की 2018 में जाकर शून्य हो गया।