सरकार की खुल गई पोल ! झारखंड की हालत बयां कर रही है ये तस्वीरें

झारखंड राज्य जब बिहार से अलग हुआ तो इसका सबसे बड़ा एक कारण था नए राज्य झारखंड का विकास करना. लेकिन आपको क्या लगता है झारखंड राज्य में विकास हुआ है या अभी हो रहा है ? विकास तो छोड़िए क्या झारखंड में बेसिक जरूरत की चिजें लोगों तक पहुंची है ?  किसी भी राज्य की सबसे बेसिक जरूरत हॉस्पिकल,सड़क और शिक्षा है. बावजुद इसके आपको क्या लगता है झारखंड में ये बेसिक जरूरत की चीजें क्या सब तक पहुंच पाती है या फिर क्या प्रदेशवासी वहां तक पहुंच पाते है ? सवाल तो कई सारें है जो मन में उठते है ?

हालांकि जो ताजा खबरें झारखंड से आई है वो चौंकाती तो नहीं है क्योंकि कई दफा ऐसी खबरें राज्य से सामने आती रहती है. हां लेकिन ये खबरें जरूर आपके मन में उठते सवालों को हल कर देंगी ? तो पूरी खबर पढ़िए. झारखंड के लिए उठते इन सवालों के जवाब आपको खुद मिल जायेंगे…

खबर कुछ ऐसी है…

झारखंड सरकार लगातार स्वास्थ्य सेवाओं के अच्छे दावे करती रहती है लेकिन वो हर बार विफल साबित होते है. ताजा खबर साह‍बिगंज जिले का है. यहां साह‍बिगंज जिले में एक महिला मरीज को उसके परिजनों ने खटिया के सहारे कंधे पर टांगकर करीब 12 किलोमीटर पैदल चले. तब जाकर महिला मरीज सदर अस्पताल पहुंची. सोचिए ये उस जिले की तस्वीर है जहां से खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन विधायक है. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन साह‍बिगंज जिले की बरहैत सीट से विधायक हैं.

दरअसल, हुआ कुछ यूं कि साह‍बिगंज के गदाई दियरा में एक महिला की अचानक तबीयत खराब हो गई. जिसके बाद परिजनों ने 108 नंबर पर फोन कर एंबुलेंस की मांग की. फोन पर कहा गया की एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है. वाहन उपलब्ध नहीं होने का बहाना बनाकर एंबुलेंस देने से मना कर दिया गया. इसके बाद बिगड़ती तबीयत को देख परिजन महिला मरीज को खटिया पर ही लादकर अस्पताल ले जाने के लिए मजबूर हो गए. परिजनों ने तकरीबन 12 किलोमीटर पैदल दूरी तय कर खटिया पर मरीज को अस्पताल पहुंचाया.

ऐसी ही एक और ताजा खबर सामने आई है. इसको लेकर राज्य के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने ट्वीट भी किया है और इसके साथ एक बेहद ही पीड़ा दायक तस्वीर भी शेयर की है. झारखंड के चाईबासा जिले  की ये तस्वीर झारखंड सरकार की ग्रामीण उत्थान की पोल खोलती है. साथ ही ये तस्वीर आबुआ राज की बात करनेवालों के मुंह पर एक तमाचा है. जो आए दिन ग्रामीण विकास और महिलाओं के लिए किए गए कार्यों का दावा करते है.

ये तस्वीर पश्चिमी सिंहभूम जिले के मझगांव विधानसभा क्षेत्र के मंझारी प्रखंड के एक गांव की है. दरअसल, हुआ यूं कि शनिवार को दोपहर में जोजोबेड़ा निवासी दिनेश तामसोय की पत्नी मालती तामसोय अचानक प्रसव पीड़ा से छटपटाने लगी. इसके बाद कई बार सरकारी एम्बुलेंस 108 पर संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन संपर्क नहीं हो पाया. प्रसव पीड़ा से छटपटाती मालती को सरकारी एंबुलेंस नहीं मिली.

फिर क्या था प्रसव पीड़ा से छटपटाता देख परिजनों ने निजी वाहन मंगाई मगर बारिश के कारण सड़क इतना कीचड़मय हो गयी कि वो दलदल बन गई. किसी को कोई उपाय नहीं सूझा तो गांव की महिलाओं ने मालती को गोद में उठा कर करीब एक किलोमीटर तक पैदल चलकर वाहन तक पहुंचाया. इसके बाद उसे सदर अस्पताल चाईबासा में लाकर भर्ती करवाया गया. मालती की किस्मत अच्छी रही कि इतनी परेशानियों के बाद भी उसने अस्पताल में एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया और खुद भी सुरक्षित है. लेकिन सोचिए इस गांव की स्थिति के बारे में जहां ना गाड़ी चलने लायक सड़क है और ना ही स्वास्थ्य की सुरक्षा को लेकर कोई इंतेजाम.

इस खबर को लेकर बाबूलाल मरांडी ने भी ट्वीट कर लिखा- दुःखद व शर्मनाक। पश्चिमी सिंहभूम के मझगांव विधानसभा क्षेत्र की यह ख़बर राज्य सरकार के विकास के खोखले दावों की जीवंत तस्वीर है। एम्बुलेंस और सड़क के अभाव में एक गर्भवती महिला को इस प्रकार अस्पताल ले जाने को मजबूर परिजन स्वयं राज्य सरकार की कार्यशैली और जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न है।

झारखंड में अभी भी कई ऐसे इलाके हैं, जहां स्वास्थ्य सेवा तो दूर अस्पताल आने के लिए एंबुलेंस भी मरीजों को उपलब्ध नहीं हो पाती है. कई ऐसी सड़के है जिसका कोई वजूद ही नहीं है. ऐसे में झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं के अच्छे दावे लगातार विफल हो रहे हैं. अभी भी मरीजों तक एम्बुलेंस पहुंचाने का सरकार का दावा खोखला साबित हो रहा है. लगातार सरकार द्वारा गिनाएं जा रहे वादों का तो आप खुद सोच लिजीए.