पिघलते ग्लेशियर से लगातार बढ़ रहा है समुंद्र का जलस्तर! वैज्ञानिकों की चेतावनी

ग्लोबल वार्मिंग का असर धरती को किस तरह प्रभावित कर रहा है इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा लीजिये कि 2000 से 2019 के दौरान दुनिया भर में ग्लेशियरों में जमा बर्फ औसतन 26,700 करोड़ टन प्रति वर्ष की दर से पिघल रही है. इससे पहले 2000 से 2004 के बीच यह 22,700 करोड़ टन प्रति वर्ष की दर से पिघल रही थी, बर्फ के पिघलने की यह दर 2015 से 2019 के बीच रिकॉर्ड 29,800 करोड़ टन प्रतिवर्ष पर पहुंच गई थी. अंतराष्ट्रीय जर्नल नेचर में छपे शोध के मुताबिक पिछले 20 वर्षों में बर्फ के खोने की दर में 31.3 फीसदी का इजाफा हुआ है.

अक्सर समुन्द्र के अंदर पिघले वाली बर्फ से हमें कोई फर्क नही पड़ता क्योंकि इसका नुकसान धीरे धीरे सामने आता है. लेकिन अगर यही बर्फ जब जोशीमठ के आसपास पिघलती है.. हिमालय की बर्फ पिघलती है तो हम इसे एक बड़ी त्रासदी के रूप देखते हैं..
समुन्द्र के अंदर पिघलने वाली बर्फ से  समुंद्री किनारे पानी में डूब रहे हैं,,, लाखों हेक्टेयर जमीन समुन्द्र में समा रही है लेकिन ये सब धीरे धीरे हो रहा है जिसका एहसास सिर्फ समुन्द्र के कनारे रहने वाले लोग ही कर पा रहा है.
डाउन तो अर्थ में छपी एक रिपोर्ट की माने तो ग्लेशियर किस रफ्तार से पिघल रहे हैं इसे समझने के लिए वैज्ञानिकों ने उपग्रहों की मदद से दुनिया के करीब 217,175 ग्लेशियरों का अध्ययन किया है, जोकि 7 लाख वर्ग किलोमीटर से ज्यादा क्षेत्र में फैले हैं| यह दुनिया के करीब 99.9 फीसदी ग्लेशियर हैं| यदि ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका पर जमा बर्फ के पिघलने से तुलनात्मक रूप में देखें तो पिछले 20 वर्षों में इन ग्लेशियरों से जितनी बर्फ पिघली हैं वो ग्रीनलैंड में बर्फ के पिघलने से करीब 47 फीसदी ज्यादा है, जबकि अंटार्कटिका में बर्फ के पिघलने से करीब दोगुनी ज्यादा है|2000 से 2019 के बीच ग्लेशियरों के पिघलने के कारण हर वर्ष समुद्र का जलस्तर 0.74 मिमी की गति से बढ़ रहा है।

जिसका मतलब है कि पिछले 20 वर्षों के दौरान समुद्र के जलस्तर में जो वृद्धि हुई है उसके पांचवे हिस्से के लिए इन ग्लेशियरों का पिघलना ही जिम्मेदार है| शोध के अनुसार सदी के अंत तक करीब 20 करोड़ लोग समुद्र के बढ़ते जलस्तर से प्रभावित होने वाले है.
ग्लेशियर का पिघलना इंसानों के लिए एक बड़ी चेतावनी है.. क्योंकि भारत जैसे कई देशों में ग्लेशियर ही पीने के लिए साफ़ पानी, सिंचाई के लिए पानी के लिए एक बड़ा स्रोत हैं. अगर इसी तरफ बर्फ पिघलती रही तो एक दिन आधी धरती पानी में समा सकती है तो कुछ हिस्से सूखे की जद में आ सकते हैं.