मच्छरों से बचाओं के लिए कोई ठोस उपाय नहीं ! चौंकाने वाली रिपोर्ट आई सामने

दुनियाभर में मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियां से हर साल लाखों  लोगों की मौत हो जाती है. जैसा की देश के अलग-अलग हिस्सों में जुलाई से लगातार बारिश हो रही है, इस वजह से कुछ राज्यों में मच्छर का प्रकोप ज्यादा बढ़ गया है. अस्पतालों में डेंगू और मलेरिया के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं. यही वजह है कि देश में प्रशासन ने दवा के छिड़काव से लेकर कई तरह के बचाव के उपायों का प्रबंधन किया है.मच्छरों को मारने के लिए इनडोर और आउटडोर फॉगिंग का सहारा लिया जा रहा है. हालांकि इस संबंध में लोकल सर्किल्स के एक सर्वेक्षण में चौंकाने वाली बात सामने आई है.

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इस रिपोर्ट के मुताबिक, 70 फीसदी भारतीय परिवारों का कहना है कि उनके नगर निगम या पंचायत अपने क्षेत्र में मच्छर मारने के लिए फॉगिंग बिल्कुल नहीं करते हैं या शायद ही कभी कोई फॉगिंग की होगी. लोकलसर्किल ने भारत के 352 जिलों में रहने वाले 38 हजार  से अधिक भारतीयों से राय लीं. इसमें 61 फीसदी पुरुष थे जबकि 39 फीसदी महिलाएं थीं.

इस सर्वेक्षण में 70 फीसद ने बताया कि उनके यहां नगर निगमों और पंचायतों ने कभी छिड़काव ही नहीं किया या साल में बमुश्किल एक या दो बार किया. निश्चित तौर पर ये चिंताजनक और हैरान करने वाली बात है. सर्वेक्षण में मच्छरों से बचाव के तौर-तरीकों पर भी कई बातें सामने आई हैं. सोचिए ऐसी स्थिति तब है जब दुनिया मच्छरजनित रोगों से कराह रही है और भारत को इससे प्रभावित देशों में से एक माना जाता है. तब हालात कुछ ऐसे है…

इस रिपोर्ट के मुताबिक , 79 फीसदी भारतीय परिवार हर महीने खुद ही मच्छर नियंत्रण का खर्चा उठा रहे हैं. 35 फीसदी से ज्यादा परिवार हर महीने 200 रुपये या अधिक खर्च कर रहे हैं. केवल 5 फीसदी भारतीय परिवार मच्छर मारने के लिए फॉगिंग का इस्तेमाल करते हैं, जबकि अधिकांश परिवार दवाओं, रैकेट, कॉइल, स्प्रे या क्रीम पर निर्भर हैं.

इन लोगों से जब ये पुछा गया कि नगर निगम या पंचायत ने उनके एरिया में कितनी बार फॉगिंग की. इसके जवाब में 37 फीसदी लोगों ने कहा कि नगर पालिका या पंचायत ने कभी भी फॉगिंग का इस्तेमाल नहीं किया गया. 33 फीसदी ने कहा कि 1 से 2 बार, 10 फीसदी ने कहा कि 3-6 बार, 8 फीसदी ने कहा कि 6 से 12 बार और 5 फीसदी लोगों ने कहा कि उनके एरिया में 12 बार से ज्यादा सालभर में फॉगिंग हुई. 7 फीसदी नागरिकों ने कोई जवाब नहीं दिया. कुल मिलाकर 70 फीसदी भारतीय परिवारों का कहना है कि उनका नगर निगम या पंचायत अपने क्षेत्र में मच्छर नियंत्रण के लिए फॉगिंग नहीं करता है या शायद ही कभी करता है.

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ये संकट कितना बड़ा है इसको हम कुछ पोवाइंटस् मे समझ सकते है-

sciencefocus के एक रिपोर्ट के मुताबिक मच्छर के काटने से हर साल दुनिया में 7 लाख 25 हजार लोगों की जान चली जाती है.

endmalaria.org  के मुताबिक, मच्छर के काटने से हर साल 10 लाख लोगों की मौत हो जाती है.

संक्रामक रोगों की तुलना में मच्छर से 17 गुना अधिक लोग शिकार होते हैं.

मच्छरों के कारण इंसानों में जो बीमारियां सबसे खतरनाक साबित होती हैं, उनमें-मलेरिया, डेंगू, वेस्ट नाइल वायरस, चिकनगुनिया, ज़ीका और यलो फीवर शामिल हैं.

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, मलेरिया विश्व स्तर पर अनुमानित 219 मिलियन मामलों का कारण बनता है और इसके परिणामस्वरूप हर साल 4 लाख से अधिक मौतें होती हैं. इनमें ज्यादातर पांच साल से कम उम्र के बच्चे होते हैं.

दूसरी ओर, डेंगू से लगभग 96 मिलियन लोग संक्रमित होते है और हर साल डेंगू से अनुमानित 40 हजार मौते हो जाती है. एडीज मच्छर के कारण होने वाला डेंगू सबसे ज्यादा होने वाली संक्रामक बीमारी है. 129 देशों में 3.9 अरब आबादी इसके खतरे की जद में है.

खतरा कितना बड़ा है ये तो आप इस पोवाइंट्स से ही समझ गए होंगे. लेकिन उपाय के नाम पर देश में क्या व्यवस्था है ये भी इस सर्वेक्षण ने बता दिया है ऐसे में जिन मच्छरों को हम हल्के में लेते हैं, वो कितना खतरनाक है ये बात समझने वाली है…तो मच्छरों से सतर्क रहे और इनको हल्के में बिल्कूल भी ना लें.