कोरोना काल में नहीं हुआ था प्रदूषण कम, संयुक्त राष्ट्र की चौंकाने वाली रिपोर्ट

साल 2020 में जब कोरोना वायरस अपना रौद्र रूप दिखा रहा था और भारत समेत दुनिया के तमाम देशों में लॉकडाउन लगा था तब कुछ रिपोर्ट में प्रदूषण की मात्रा में भारी गिरावट बताई गई थी. सोशल मीडिया पर उन इलाकों की कई तस्वीरें शेयर की गईं जिसमें साफ हवा के कारण नजारे बहुत साफ दिखने लगे थे. भारत में भी उत्तर प्रदेश के कई मैदानी इलाकों से दूर हिमालय के पर्वत दिखने लगे थे जो पहले नहीं दिखा करते थे. लोगों को लगने लगा था कि लॉक्डाउन के कारण बंद हुई मानवीय गतिविधियों ने जलवायु परिवर्तन को कुछ रोके रखा होगा. लेकिन संयुक्त राष्ट्र की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट ने इस सारी बातों पर मिट्टी डाल दी है. हालिया जारी इस रिपोर्ट में साफ बताया गया है कि महामारी ने जलवायु परिवर्तन की गति बिलकुल भी धीमी नहीं की है.

World leaders return to UN with focus on COVID-19 pandemic, climate change  - BusinessToday

संयुक्त राष्ट्र की ओर से जारी इस रिपोर्ट में चेताया गया है कि कोविड-19 महामारी ने जलवायु परिवर्तन की रफ्तार धीमी नहीं की है. यूएन की इस रिपोर्ट में विश्व मौसम विज्ञान संगठन की ओर से कहा गया है कि लॉकडाउन और आर्थिक मंदी की वजह से पिछले साल कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन केवल अस्थायी रुप से कम हुआ था.संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतरेस का कहना है कि यह जलावायु एक्शन के लिए एक नाजुक साल है. नतीजे चेता रहे हैं कि हम कहां तक पहुंच सके हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि 2021 में सड़क परिवर्तन से उत्सर्जित CO2 की मात्रा महामारी के फैलने के स्तर से कम थी. लेकिन ग्रीन हाउस गैसों का ग्लोबल वार्मिंग में योगदान लगातार बढ़ता ही रहा.

World leaders return to U.N. with focus on pandemic, climate

गुतरेस ने कहा कि दुनिया में वैश्विक गर्मी की बढ़त को 1.5 डिग्री सेंटीग्रेड तक रोकना असंभव ही होगा जब तक ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को तुरंत और तेजी से बड़े पैमान पर रोकने का काम नहीं होगा. ऐसा नहीं होने पर हमारे लोगों और ग्रह को जल्दी ही विनाशकारी नतीजों को भुगतने के लिए तैयार होना होगा. इस रिपोर्ट के आने के बाद ये तो साफ हो गया है कि जो लोग  सोच रहे थे कि कोविड-19 लॉकडाउन का वायुमंडल पर सकारात्मक असर हुआ होगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं था.