दुनिया में आ सकती हैं और भी खतरनाक महामारी, वैज्ञानिकों ने लोगों को क्या दी सलाह

आइये जानते हैं उन आठ बीमारियों के बारे में जो हैं कोरोना से भी खतरनाक और इसीलिए वैज्ञानिक भी इनसे बचने की सलाह दे रहे हैं. और अगर हमने इनसे बचने की कोशिश नही की तो कोरोना से भी बिकराल महामारी का रोप लेकर ये हमें बर्बाद कर सकते हैं.

इसलिस्ट में सबसे पहले नंबर है इबोला
अफ्रीका में  इबोला के चलते 88 फीसद संक्रमित लोगों की जान चली गई थी. ये बीमारी जानवरों से इंसान में फैलती है. WHO का दावा है कि इबोला इंसान से इंसान में भी ट्रांसमित होता है. हाल ही में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, इबोला के 3400 मामलों में से 2270 लोगों की मौत हुई है. इबोला के लिए वैक्सीन भी बनायी गयी थी लेकिन उसका आज कोई अटा पता नही है… विज्ञानिक कहते हैं कि अगर इस बीमारी को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नही उठाये गये तो ये बेहद खतरनाक रूप ले सकती है.

लासा फीवर : लासा फीवर की चपेट में आने वाले हर पांचवें शख्स की किडनी, लिवर और स्प्लीन पर बहुत बुरा असर होता है. घर की दूषित चीजों, यूरीन, मल और ब्लड ट्रांसफ्यूशन के जरिए यह बीमारी लोगों में फैल सकती है. आफ्रीका में ये बीमारी अभी फ़ैल रही है…. चिंता की बात ये है कि इस बीमारी की अभी तक कोई भी वैक्सीन नही है.

मार्गबर्ग वायरस डिसीज : मार्गबर्ग वायरस को सबसे अधिक जानलेवा भी कहा जा सकता है. ये रोग बेहद संक्रामक है और जीवित या मृत लोगों को छूने से भी फैल जाता है. इस महामारी का पहला प्रकोप साल 2005 में युगांडा में देखा गया था, जहां इसने संक्रमित हुए 90 प्रतिशत लोगों की जानें ले ली थीं. ये वायरस भी इबोला के खानदान से ही मतलब इबोला की ही फॅमिली से संबंधित है.

SARS- सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (SARS) भी उसी वायरस की फैमिली से आता है जो कोविड-19 के लिए जिम्मेदार है. इस बीमारी का पहला मामला साल 2002 में चीन में दर्ज किया गया था. SARS करीब 26 देशों में फैला और करीब 8,000 लोग इसकी चपेट में आए सिवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम अथवा सार्स  कोरोनावाइरस द्वारा जनित श्वसन से संबंधित रोग है.

निपाह वायरस- निपाह वायरस को खसरे के वायरस से जोड़कर देखा जाता है जो साल 2018 में केरल में बड़े पैमाने पर फैला था. उस समय निपाह के संक्रमण से 17 लोगों की मौत हो गई थी। इसे डेडली वायरस भी कहा जाता है, क्योंकि इस वायरस से संक्रमित 75 प्रतिशत लोगों की मौत हो जाती है। विशेषज्ञों की मानें तो निपाह वायरस के लिए भी फ़िलहाल कोई दवा अथवा वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। इसके लिए बचाव ही सुरक्षा कवच है।

डिजीज एक्स :  अफ्रीकी वायरस इबोला का पता लगाने वाले डॉक्टर जीन जैक्स मुएंब तामफम ने यह चेतावनी जारी की है और बताया है कि अभी डिजीज एक्स वायरस के प्रसार होने की संभावना है। डॉ. तामफम के मुताबिक डिजीज एक्स मौजूदा कोरोना वायरस से ज्यादा घातक है। उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस के मुकाबले यह वायरस तेजी से फैलता है। इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि इस नए वायरस से मरने वालों की संख्या इबोला की तुलना में 50-90 फीसदी तक ज्यादा हो सकती है।