ये है वो वृक्ष जिनके पास है हर मर्ज की दवा!

कुदरत के दिए गए वरदानों में एक से एक बेहतरीन चीजें उपलब्ध है..इन्हीं दिए गए वरदानों में पेड़-पौधों का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है. आदिवासी मान्यताओं के अनुसार,संसार में पाए जाने वाले हर एक पेड़-पौधे में कोई ना कोई औषधीय गुण जरूर होता है, ये बात अलग है कि औषधि विज्ञान के अत्याधुनिक हो जाने के बावजूद भी हजारों पेड़-पौधे ऐसे हैं, जिनके औषधीय गुणों की जानकारी किसी को नहीं..ज़्यादातर यह मानना है कि छोटे पेड़ या जड़ी-बूटियों में ही ज्यादा औषधीय गुण पाए जाते हैं, जबकि ऐसी सोच निर्रथक है, मध्यम आकार के पेड़ और बड़े-बड़े वृक्षों और उनके तमाम अंगों में गजब के औषधीय गुणों की भरमार होती है. बहुत से ऐसे औषधीय पेड़ है जो आपके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत ही लाभदायक साबित होते हैं। तो आइए आपको ऐसे ही कुछ औषधीय पेड़ों के बारे में जानकारी देते हैं.

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कदम्ब का पेड़

कदम्‍ब के पत्‍ते बड़े और मोटे होते हैं और इनसे गोंद निकलता है जबकि इसके फूल छोटे और खुशबूदार होते हैं। कदम्‍ब के फलों के रस..बच्चों के पेट से जुड़ी बिमारीया ठीक करने के लिए बहुत ही लाभदायक होता है और इसकी पत्तियों के रस को अल्सर और घाव ठीक करने के लिए प्रयोग किया जाता है. इसमें मौजूद इड्रोसिनकोनाइन और कैडेमबाइन नामक दो प्रकार के तत्‍व टाइप-2 डाइबिटीज के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. इसके अलावा इसकी जड़ मूत्र रोगों में लाभकारी होती है और इसकी छाल को घिस कर आंखों के बाहर लगाने से कंजक्टिवाइटिस(Conjunctivitis) रोग ठीक हो जाता है।

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नीम

भारत में एक कहावत बहुत ही पॉपुलर है कि जिस धरती पर नीम के पेड़ होते हैं वहां बीमारियां और मृत्‍यु कैसे हो सकती है। इस वृक्ष में ढेरों औषधीय गुण पाएं जाते हैं। एंटीबायोटिक तत्वों से भरपूर नीम को सर्वोच्च औषधि के रूप में जाना जाता है। यह स्वाद में भले ही कड़वा होता लेकिन इससे होने वाले लाभ अमृत के समान होते हैं. भारत में इसके औषधीय गुणों के कारण हजारों वर्षों से इसका इस्‍तेमाल किया जाता रहा है।मगर,अब अन्य देश भी इसके गुणों के प्रति जागरूक हो रहे हैं। नीम के बारे में ऐसा भी कहा गया है कि एक नीम और सौ हकीम दोनों बराबर है। इसका साबुन, एंटीसेप्टिक क्रीम, दातुन, मधुमेह नाशक चूर्ण, कॉस्मेटिक आदि के रूप में प्रयोग किया जाता है। नीम की छाल में ऐसे गुण होते हैं, जो दांतों और मसूढ़ों में लगने वाले तरह-तरह के बैक्टीरिया को पनपने से रोकते है, जिससे दांत स्वस्थ और मजबूत रहते हैं।त्वचा रोग होने पर, नीम के पत्तों का लेप लगाने से काफी लाभ मिलता है.

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बबूल का पेड़

बबूल का गोंद चिकित्सा की दृष्टी से बहुत ही उपयोगी है.बबूल कफ और पित्त का नाश करने वाला होता है. इसकी गोंद में कैल्शियम, मैग्नीशियम और पोटेशियम होता है. इसके साथ ही बबूल के पेड़ की छाल और पत्तियों में टैनिन और गैलिक नामक एसिड होता है जिसके कारण इसका स्‍वाद कड़वा हो जाता है। यह जलन को दूर करने वाला, घाव को भरने वाला और रक्तशोधक होता है। इसकी फलियां कच्ची और लाभकारी होती हैं। इसलिए इसकी कच्ची फलियों को तोड़कर छाया में सुखाकर किसी डिब्बे में बंद कर सुरक्षित रखा जा सकता है। फलियां एक साल तक गुणकारी रहती हैं जबकि छाल दो साल तक लाभकारी रहती है।( बबूल का वृक्ष मध्यमाकार , कांटे दार होता है।इसके पत्ते गोलाकार और छोटे छोटे होते हैं।

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अशोक

अशोक के पेड़ के बारे में ऐसा कहा गया है कि जिस पेड़ के नीचे बैठने से शोक नहीं होता, उसे अशोक कहते है. इसका पेड़ औषधीय गुणों से भरपूर होता है. अशोक का रस कसैला, कड़वा, और इसकी प्रकृति ठंडी होती है. इससे रंग निखरता है और सूजन दूर होता है.इसके अलावा यह रक्त विकार, पेट के रोग, बुखार और जोड़ों के दर्द को दूर करने में बहुत लाभकारी होते हैं. अशोक का बीज पत्थरी की समस्या से आराम दिलाता है. अशोक की छाल के काढ़े में बराबर मात्रा में सरसों का तेल मिला कर फोड़े-फुंसियों पर लगाने से लाभ मिलता है। साथ ही अशोक के छाल को नियमित रूप से सेवन करने से दिमाग़ तेज़ होता है..

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बरगद

बरगद को अक्षय वट भी कहा जाता है, क्योंकि ये पेड़ कभी नष्ट नहीं होता है. बरगद की जड़ों में एंटीऑक्सीडेंट सबसे ज्यादा पाए जाते हैं.इसके इसी गुण के कारण वृद्धावस्था की ओर ले जाने वाले कारकों को दूर भगाया जा सकता है। बरगद की छाल का काढा बनाकर प्रतिदिन एक कप मात्रा में पीने से डायबिटीज में फायदा होता है और शरीर में मज़बूती आती है.पैरों की फटी पड़ी एड़ियों पर बरगद का दूध लगाने से कुछ ही दिनों में फटी एड़ियां सामान्य होने लगती हैं.इसका उपयोग याददाश्त बेहतर करने के लिए भी किया जाता है.

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आंवला

आंवला प्राकृति का ऐसा नायाब तोहफा है जिससे शरीर की कई सारी बीमारियों का इलाज किया जा सकता है। आंवले में आयरन, विटामिन सी और कैल्शियम भरपूर मात्रा में होने की वजह से पाचन दुरुस्त, त्वचा में चमक, त्वचा के रोगों में लाभ, बालों की चमक बढाने, किडनी को स्वस्थ, बालों को सफेद होने से रोकने के अलावा और भी बहुत सारे फायदे मिलते हैं। आंवले के रस में संतरे के रस की तुलना में 20 गुना अधिक विटामिन सी पाया जाता है। आंवले का सबसे बड़ा गुण यह है कि इसे पकाने के बाद भी इसमें मौजूद विटामिन सी खत्म नहीं होता। आंवले में क्रोमियम काफी मात्रा में होता है, जो डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद है।आंवला हमारी आंखों के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। इसलिए अगर आपको भी अच्‍छी सेहत का मालिक बनना है तो आंवला का जूस अभी से ही पीना शुरु कर दें.

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पीपल

पीपल का पेड़ न केवल एक पवित्र धार्मिक वृक्ष है बल्‍कि इसे स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभदायक माना जाता है.वैज्ञानिकों ने भी इस पेड़ को प्रकृति और आयुर्वेदिक दवाओं के लिए लाभकारी सिद्ध कर दिया है. यह विशाल पेड़ 24 घंटे ऑक्सीजन प्रदान करता है. आयुर्वेद के अनुसार पीपल का हर भाग जैसे तना, पत्ते, छाल और फल चिकित्सा के काम आता हैं. पीपल रक्त पित्त नाशक, रक्त शोधक, सुजन मिटाने वाला, शीतल और रंग निखारने वाला है. पीपल की छाल को घिसकर लगाने से फोड़े फुंसी और घाव और जलने से हुए घाव भी ठीक हो जाते है.

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अर्जुन

अर्जुन की छाल में अनेक प्रकार के रासायनिक तत्व पाये जाते हैं. कैल्शियम-सोडियम की प्रचुरता की वजह से यह हृदय की मांसपेशियों के लिए अधिक लाभकारी होता है. अर्जुन शीतल, हृदय के लिए हितकारी, स्वाद में कसैला, घाव, क्षय, विष, रक्तविकार, मोटापा, कफ और पित्त को नष्ट करता है. पेशाब की जलन और चर्म रोगों में इसका चूर्ण विशेष रूप से लाभकारी होता है. हड्डी टूटने पर इसकी छाल का स्वरस दूध के साथ रोगी को देने से सूजन और दर्द कम होता हैं. ऐसे और भी कई औषधीय पेड़ है जो न केवल अपना औषधीय महत्व रखते हैं बल्कि आय का भी एक जरिया बन जाते हैं। जन्म से लेकर मृत्यु के बाद तक मनुष्यों को विभिन्न कारणों से पेड़ों पर आश्रित रहना पड़ता है। पेड़ों से आक्सीजन मिलने के साथ रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लकड़ी भी मिलती है। तो इसलिए ज़रूरी है पेड़ों की रक्षा करना और ज़्यादा से ज़्यादा पेड़ लगाना..