दुनिया का सबसे बड़ा ग्लेशियर, जो बन सकता है धरती के लिए काल!

ग्लेशियर धरती पर बड़ी तबाही ला सकते है. इसका एक छोटा सा नमूना हमने कुछ दिन पहले उत्तराखंड के जोशीमठ में देखा.. ये तो कुछ भी नही है धरती पर इतने बड़े बड़े ग्लेशियर मौजूद है जो कई देशों को डूबा सकते हैं. आज इस वीडियो हम करने जा रहे हैं धरती पर मौजूद सबसे बड़े ग्लेशियर की.

अंटार्कटिका का थ्वाइट्स ग्लेशियर (Thwaites glacier) दुनिया का सबसे बड़ा ग्लेशियर माना जाता है और ये सबसे बड़ा है इसलिए ही ये सबसे खतरनाक भी है.. इसपर दुनियाभर के विशेषज्ञों की निगाहें रहती हैं. अंटार्कटिका के पश्चिमी इलाके में स्थित ये ग्लेशियर समुद्र के भीतर कई किलोमीटरों की गहराई में डूबा हुआ है. वहीं इसकी चौड़ाई लगभग 468 किलोमीटर है. ये किसी समुद्री दानव से कम नही है.. इससे अगर मजबूत से मजबूत जहाज भी टकराए तो भयंकर दुर्घटना हो सकती है.


यहां की बर्फ पूरी दुनिया के पहाड़ों पर इकट्ठा बर्फ से भी 50 गुना से ज्यादा है. थ्वाइट्स का क्षेत्रफल 1,92,000 वर्ग किलोमीटर है. अब इसकी विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाई लीजिये कि भारत की राजधानी 1483 वर्ग किलोमीटर में फैली है और ये विशालकाय ग्लेशियर 1,92,000 वर्ग किलोमीटर में फैला है.. मतलब बिहार, पंजाब, हरियाणा, झारखण्ड, उत्तराखंड से बड़ा.. और लगभग लगभग गुजरात के बराबर के आकार का है ये ग्लेशियर..
सोचिये इतना बड़ा ग्लेशियर जब पिघलेगा तो धरती पर कैसी तबाही मचेगी.. लेकिन दुःख की बात यही है कि ये ग्लेशियर अब पिघल रहा है. नासा के वैज्ञानिकों इस पर स्टडी कर रही है.. मीडिया रिपोर्ट की मने तो स्टडी में ये बात सामने आई है कि पिछले तीन सालों में इस ग्लेशियर से 14 खरब टन बर्फ पिघल चुकी है..
इस ग्लेसियर तक पहुंचना, उसे समझना, गतिविधयों का पता लगाना आसान नही है.. यहाँ का मौसम बेहद तूफानी होता है जिसके कारण सेटेलाइट तस्वीरें भी साफ़ साफ़ नही मिल पाती.. हाल ही में अमेरिका और ब्रिटेन ने केवल इस ग्लेशियर की तस्वीर निकालने के लिए एक बड़ा करार किया, जिसे इंटरनेशनल थ्वाइट्स ग्लेशियर कोलेबरेशन कहा गया!


जिस हिसाब से इस ग्लेशियर के पिघलने की रफ़्तार है और जो भी कुछ हम इस धरती पर कर रहे हैं उससे यही अंदाजा लगाया जा रहा हा कि ये ग्लेशियर 150 सालों में पिघल जाएगा.. लेकिन इसके पिघल समुन्द्र का सत्र लगभग 5 फीट तक बढ़ जाने की संभवाना है.. अगर ऐया होता है तो ना जाने कितने तटीय इलाके समुन्द्र में डूब जाए.. लाखों लोगों की जान चली जायेगी या फिर उन्हें कहीं और बसना पड़ेगा.. परिणामस्वरूप अर्थ्वय्स्व्था चरमारा जायेगी, भुखमरी बढ़ जायेगी और वो स्थिति आ जाएगी जिसे महामंदी कहा जाता है.
इतना ही नही दुनिया के ताजे पानी में अंटार्कटिक की बर्फ की हिस्सेदारी नब्बे फीसदी है अगर येबर्फ तेजी से पिघल गयी तो समुन्द्र का जलस्तर तो बढ़ जाएगा लेकिन मीठे पानी की कमी हो जाएगी.. वे नदियाँ सूख जायेंगी जिनमें इस गेल्शियर का पानी पहुँचता है परिणामस्वरूप में 90 फीसद ताजा पानी देने वाला स्त्रोत खत्म होते से भीषण सूखा पड़ जाएगा..!
तो इन सबसे बचने के लिए पर्यावरण को संरक्षित करने में अपना योगदान दीजिये.. ताकि ग्लोबल वार्मिंग को कम किया सके.. पेड़ पौधे लगायें. प्रदुषण कम फैलाएं.. और इस वायुमंडल और पर्यावरण की रक्षा करें.