क्या सच में मजदूरों से वसूला गया किराया? जमकर हो रही है राजनीति

लॉकडाउन के कारण अन्य राज्यों में फंसे मजदूरों को उनके जिले तक पहुँचाने का काम शुरू हो चुका है. कई राज्यों के मजदूर कई शहरों से निकलकर अपने गृह जनपद तक पहुँच रहे हैं लेकिन इन सबके बीच अब शुरू हो गयी है राजनीति! मजदूरों से किराया वसूले जाने की खबर जमकर बवाल हो रहा है लेकिन अब रेल मंत्रालय की तरफ से इस पर सफाई भी सामने आ गयी है.

प्रवासी मजदूरों से किराया वसूलने के मुद्दे पर राजनीति के बीच रेलवे ने साफ किया है कि उसने प्रवासी मजदूरों से कोई किराया नहीं वसूला है। समाचार एजेंसी एएनआइ ने रेल मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से बताया कि रेलवे ने प्रवासी मजदूरों को कोई टिकट नहीं बेचा है। सूत्रों के मुताबिक रेलवे राज्य सरकारों से केवल मानक किराया वसूल रहा है, जो रेलवे की कुल लागत का महज 15% है। रेलवे ने केवल राज्यों द्वारा प्रदान की गई सूचियों के आधार पर यात्रियों को ट्रेनें में यात्रा की अनुमति दी है।

रेल मंत्रालय के सूत्रों के बताया है कि रेलवे ने देश के विभिन्न हिस्सों से अब तक 34 श्रमिक विशेष ट्रेनें चलाई हैं और संकट के इस समय में विशेष रूप से गरीब से गरीब लोगों को सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा प्रदान करने की अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को पूरा कर रही है।