टीएसएएफ ने अपनाया जिम्मेदार पर्वतारोहण

जमशेदपुर: माउंट एवरेस्ट पर अप्रैल और जून 2019 के बीच दो महीने तक सफाई अभियान चलाया गया। इस अभियान के द्वारा दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण पर्वत श्रृंखला से 11,000 किलोग्राम कचरा हटाया गया। जब यह खबर दुनिया भर के अखबारों में प्रकाशित हुई, तो तो यह स्मारकीय शर्मिंदगी का सबब तो था ही, साथ ही मानवता के लिए एक बड़ा सबक भी था। प्रकृति की चुनौतियों से निपटने के लिए खोज में हमारे बीच सबसे अच्छे और बुद्धिमान भी कभी-कभी एडवेंचर स्पोर्ट्स के साथ उत्पन्न होने वाली अधिक गंभीर जिम्मेदारियों को पहचानने में विफल रहते हैं। माउंट एवरेस्ट पर कचरा जमा होने की समस्या एक ऐसे बिंदु पर पहुंच गई थी कि 2014 में नेपाल सरकार ने प्रत्येक पर्वतारोही के लिए चोटी से कम से कम 8 किलोग्राम कचरे को अपने साथ लाना अनिवार्य कर दिया था, जो कि एक पर्वतारोही द्वारा उत्पादित कचरा की अनुमानित मात्रा है। हालांकि बेशक इस तरह के प्रयास सराहनीय हैं, फिर भी यह एक सवाल पैदा करता है कि हम इस समस्या से बचने के लिए क्या कर सकते हैं।

हम यह भी जानते हैं कि यह माउंट एवरेस्ट के लिए किसी तरह से अनोखा नहीं है, लेकिन एक स्थानिक चुनौती है, जो एडवेंचर स्पोर्ट्स के अन्य रूपों में भी व्याप्त है। टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन (टीएसएएफ) ने इस चुनौती को स्वीकार किया है, जिसे व्यक्तिगत और संस्थागत दोनों स्तरों पर संबोधित करना होगा- व्यक्तिगत स्तर पर शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से और संस्थागत स्तर पर एडवेंचर स्पोर्ट्स बिरादरी के भीतर व्यवहार परिवर्तन लाने के लिए उत्प्रेरक बनकर।

भारत की लीजेंड्री पर्वतारोही और माउंट एवरेस्ट को फतह करने वाली पहली भारतीय महिला बछेंद्री पाल द्वारा 1984 में स्थापना के बाद टीएसएएफ का नेतृत्व त्रिआयामी दर्शन- आत्मसम्मान, दूसरों के लिए सम्मान और पर्यावरण के प्रति सम्मान के रूप में किया गया है।व्यक्तिगत जिम्मेदारी के स्पर्श के साथ एडवेंचर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देना पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका है। उदाहरण के लिए, यात्रा का कोई निशान नहीं छोड़ने और यहां तक कि इसे बेहतर बनाने की कोशिश करने का सिद्धांत सभी टीएसएएफ द्वारा प्रस्तावित पाठ्यक्रमों और अभियानों का एक अभिन्न अंग है। टीएसएएफ ने उत्तरकाशी के काफ्लोन शिविर में एक शून्य अपशिष्ट नीति भी अपनाई है।