रामचरितमानस लिखने वाले कवि का जीवन बदल दिया था पत्नी की इस बात ने

विश्व को रामचरित मानस के रूप में अनुपम, अद्भुत  ग्रंथ देने वाले गोस्वामी तुलसीदास जी का जन्म पवित्र चित्रकूट के राजापुर गांव में आत्माराम दुबे और हुलसी के घर पर संवत 1554 की श्रावण शुक्ल सप्तमी के दिन हुआ था । इस साल तुलसीदास जयंती 04 अगस्त 2022, दिन गुरुवार को मनाई जाएगी। इस वर्ष तुलसीदास जी की 523वीं जयंती मनाई जाएगी।

कौन थे गोस्वामी तुलसीदास?

विश्व को रामचरित मानस के रूप में अनुपम, अद्भुत  ग्रंथ देने वाले गोस्वामी तुलसीदास जी का जन्म पवित्र चित्रकूट के राजापुर गांव में आत्माराम दुबे और हुलसी के घर पर संवत 1554 की श्रावण शुक्ल सप्तमी के दिन हुआ था। जन्म के साथ ही उनके 32 दांत और भारी भरकम डील डौल था.  मां के गर्भ में वह  12 माह रहे थे। बचपन में उनका नाम रामबोला था। माता के स्वर्गवास के बाद उनके पिता ने उन्हें अमंगलकारी मानते हुए उनका त्याग कर दिया था। 

गोस्वामी तुलसीदास एक महान कवि एवं साहित्यकार ही नहीं अपितु एक महान धर्म तथा समाज सुधारक भी थे, मध्यकाल में हिन्दू समाज अनेक बुराइयों का शिकार बना हुआ था. देश की धार्मिक दशा भी बड़ी शोचनीय थी. चारों ओर आडम्बर तथा पाखंड फैले हुए थे। ऐसे समय में एक ऐसे महापुरुष की आवश्यकता थी जो धर्म तथा समाज में फैली हुई इन बुराइयों का निवारण कर सके. तुलसीदास ने युग की मांग को पूरा किया व अपनी रचनाओं के माध्यम से धार्मिक पाखंडों आडम्बरो तथा सामाजिक बुराइयों के निवारण पर बल दिया. इस प्रकार तुलसीदास ने हिन्दू धर्म तथा समाज के उद्धारक के रूप में प्रशंसनीय कार्य किया.

पत्नी के प्रेम में डूब गए रामबोला

तुलसीदासजी के जन्म के बाद ही उनकी माता का स्वर्गवास हो गया था और बचपन भी परिवार की वजह से कुछ खास नहीं था। जब तुलसीदासजी का विवाह हुआ तो उनको परिवार मिल गया और वह अपनी पत्नी के प्रेम में डूब गए। अपनी पत्नी के प्रति प्रेम कब आसक्ति बन गया, उनको इस बात अहसास भी नहीं हुआ। राम भक्त बनने से पहले तुलसीदासजी रामबोला था और एक साधारण व्यक्ति थे। अपनी पत्नी द्वारा अपमानित होने के बाद ही वे प्रभु श्री राम की भक्ति के मार्ग पर चल पड़े और एक साधारण व्यक्ति से गोस्वामी तुलसीदास बन गए।

12 ग्रंथों की की रचना

महान ग्रंथ श्रीरामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास ने कुल 12 ग्रंथों की रचना की। सबसे अधिक ख्याति उनके द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस को मिली।  गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित ग्रंथों में श्रीरामचरितमानस, कवितावली, जानकीमंगल, विनयपत्रिका, गीतावली, हनुमान चालीसा, बरवै रामायण आदि प्रमुख हैं। 

हनुमान जी ने की थी मदद

हिंदू मान्यता के अनुसार ऐसा माना जाता है कि तुलसीदास जी भगवान राम और हनुमान जी से मिले थे. लोकप्रिय किंवदंती के अनुसार ऐसा माना जाता है कि हनुमान जी ने तुलसीदास जी को राम चरित्रमानस दिखने में मदद की थी. बताया जाता है कि गोस्वामी तुलसीदास का जन्म बचपन में कष्टों से भरा रहा. तुलसीदास जी की माता की मृत्यु के बाद उनके पिता ने उन्हें त्याग दिया था 

हिन्दू धर्म के उद्धारक

तुलसीदास हिन्दू धर्म के उद्धारक थे. उन्होंने हिन्दू धर्म में प्रचलित आडम्बरों तथा पाखंडों का विरोध किया तथा हिन्दू धर्म की उदारता, व्यापकता तथा सहिष्णुता पर बल दिया. उन्होंने हिन्दू धर्म के मूल गुणों दया, परोपकार, अहिंसा आदि पर बल दिया तथा अभिमान, हिंसा, पर पीड़ा आदि दुर्गुणों की निंदा की। उन्होंने निराकार उपासना के स्थान पर राम की सगुण भक्ति पर बल दिया, इस प्रकार उन्होंने ऐसे समय में जबकि मुसलमानों द्वारा मूर्तियों को ध्वंस किया जा रहा था। हिन्दुओं की मूर्तिपूजा पर आस्था बनाए रखी, उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की भक्ति का आदर्श रखा तथा सगुण भक्ति को ही श्रेष्ठ बतलाया. तुलसीदास ने धार्मिक कट्टरता का विरोध किया तथा उदारता एवं सहिष्णुता पर बल दिया।

 यदपि तुलसीदास हिन्दू धर्म के रक्षक तथा उद्धारक थे, परन्तु वे साम्प्रदायिकता से कोसों दूर थे. उनकी रचनाओं में कहीं भी इस्लाम धर्म अथवा मुसलमानों के प्रति क्रोध या निंदा का भाव नहीं मिलता.