यूपी: 30 जिलों में दो फीसद से कम हुआ वन क्षेत्र, साल 2030 तक हरित आवरण बढ़ाकर 15 फिसदी करने का लक्ष्य

उत्तर प्रदेश के 30 जिले ऐसे है जहां वन क्षेत्र हर जिले में कुल भूभाग के दो फीसद से भी कम है. इतना ही नहीं, आधा दर्जन जिलों में स्थिति और भी खराब है. राज्य के जिन 30 जिलों में वन क्षेत्र बहुत कम है, इनमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 13 जिले शामिल हैं. ये जिले अलीगढ़, बागपत, बरेली,बदायूं, एटा, गौतम बुध नगर, कन्नौज, हाथरस, मैनपुरी, मथुरा, मुरादाबाद,मुजफ्फरनगर और शाहजहांपुर हैं.

इसके अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश के 14 जिलों में भी हरियाली 2 फीसद से कम है. इनमें अंबेडकरनगर, आजमगढ़, बलिया, बस्ती, देवरिया,गाजीपुर, जौनपुर, कौशांबी,कुशीनगर,मऊ, संत कबीर नगर, संत रविदास नगर, वाराणसी और सिद्धार्थनगर शामिल हैं. वहीं सेंट्रल यूपी के तीन जिले बाराबंकी, फतेहपुर और कानपुर देहात में भी हरियाली बहुत कम हैं.

इन सभी जिलों में वन क्षेत्र दो फीसद से कम है जो प्रदेश को हरा-भरा करने के समक्ष बड़ी चुनौती बनी हुई है.

हालांकि उत्तर प्रदेश में ऐसे भी नौ जिलें है जहा वनावरण 15 फीसद से अधिक है. राज्य के नौ जिले हरित आवरण में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं. राज्य का वनावरण प्रदेश के कुल भूभाग का 6.14 फीसद है. जबकि वृक्षावरण 3.05 प्रतिशत है. राज्य का सोनभद्र अकेला ऐसा जिला है जहां हरित आवरण भू भाग के एक तिहाई मानक से अधिक 36.79 प्रतिशत वन क्षेत्र से भरपूर है. वही बचे हुए आठ जिलों में भी स्थिति काफी अच्छी मानी जा सकती है. चंदौली में 22.25 फीसद, पीलीभीत में 18.64, मिर्जापुर में 18.25, चित्रकूट में 18.23, श्रावस्ती में 17.35, खीरी में 16.58, बलरामपुर में 15.71 और लखनऊ में 15 फीसद भू भाग वनावरण से घिरा है.

यहां आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में साल 2030 तक हरित आवरण बढ़ाकर 15 फीसद करने का लक्ष्य तय किया गया है. चूंकि भूमि सीमित है इसलिए हरित आवरण बढ़ाने के लिए वन क्षेत्रों के साथ-साथ सामाजिक वानिकी और खुले क्षेत्रों में भी पौधरोपण कर इस लक्ष्य को प्राप्त करने की कोशिश की जा रही है. लेकिन प्रदेश के 30 जिले जहां वन क्षेत्र दो फीसद से भी कम है ये जिले तय लक्ष्य को प्राप्त करने में बाधा बन सकते है. फिलहाल जरूरत है कि इन जिलों को पौधरोपण के जरिए हरा-भरा किया जाए. इन जिलों को हरियाली कर वन विभाग के 15 फीसद के लक्ष्य को हासिल कर पाना एक बड़ी चुनौती होगा. ऐसे में सबसे पहले प्रदेश के 30 जिले जहां वनावरण कम है उन्हें प्राथमिकता पर लेना होगा.