उत्तराखंड: रेलवे ट्रैक और हाईटेंशन लाइन हाथियों के लिए बना जानलेवा, एक और दर्दनाक घटना

बुधवार को उत्तराखंड के उधम सिंह नगर में ट्रेन से कटकर दो हाथियों की मौत हो गयी. इसके बाद तो हाथियों के झुण्ड ने जमकर हुड़दंग मचाया, लगभग 4 घंटे तक रेलवे ट्रैक पर हाथी डटे रहे. दरअसल रेलवे पटरी क्रॉस करते हुए हाथियों के झुंड में से एक हथिनी और उसका बच्चा तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में आ गए. इस वजह से हथिनी और उसके छह महीने के बच्चे की मौत हो गई. ये हादसा बुधवार को लालकुआं से रामनगर को जा रही आगरा फोर्ट ट्रेन से हुआ. यही नहीं, हादसे के बाद रेलवे ट्रैक चार घंटे तक बाधित रहा, क्योंकि इस दौरान हाथियों का झुंड पटरी के पास की जमा हो गया, जिन्हें काफी मशक्कात के बाद वन विभाग ने जंगल की ओर भगाया.

ट्रेन से कटकर हाथी और बच्चे की मौत, कई देर तक ट्रेक पर जमा रहा हाथियों का झुंड - Lok Saakshya

मिली जानकारी के मुताबिक़ ट्रेन की चपेट में सबसे पहले हाथी का बच्चा आया, जिसे बचाने के लिए उसकी मां आगे बढ़ी. इसी दौरान बच्चे के साथ हथिनी भी ट्रेन की चपेट में आ गई. वन विभाग ने शुरुआती तौर पर घटना के लिए ट्रेन के लोको पायलट को जिम्मेदार माना है, जिसकी गलती की वजह से हाथियों की जान गई. फॉरेस्ट विभाग के एसडीओ ध्रुव सिंह मर्तोलिया के मुताबिक, लोको पायलट के खिलाफ वाइल्डलाइफ एक्ट की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है.हालाँकि ये पहली दफा नहीं है जब ऐसा हादसा देखने को मिला हो…आए दिन जंगल से गुजरने वाले रेलवे ट्रैक और हाईटेंशन लाइन गजराज के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं.

ट्रेन की टक्कर से हुई हथिनी और 6 माह के बच्चे की मौत, फिर...दिखा हाथियों का ये स्वभाव - Hindi News, हिंदी न्यूज़ , Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi,

लालकुआं से लेकर रामनगर के बीच ऐसा लंबा रेलवे ट्रैक है जो घने जंगल से होकर गुजरता है, जिसमें अनेकों वन्यजीवों का बसेरा है. लेकिन हाथियों का झुंड अक्सर इसकी चपेट में आ जाता है, हाथी अपने परंपरागत रास्तों से होकर यहां से गुजरते हैं और अक्सर ट्रेन की स्पीड अधिक होने की वजह से वे दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं.

पिछले आकड़ों पर नजर डालें तो कुमाऊं मंडल के जंगल में बीते पांच सालों में छह हाथियों की ट्रेन से कटकर मौत हुई है, जबकि बीते 15 सालों में छह हाथियों की मौत हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से हुई है. वहीं दो हाथियों की मौत आपसी संघर्ष में हुई है. गढ़वाल मंडल में बीते 20 वर्ष में 17 हाथियों की ट्रेन से कटकर मौत हो चुकी है.