आखिर ब्लादिमीर पुतिन के किस बीमारी की हो रही चर्चा, जिससे उन्हें छोडनी पड़ सकती है कुर्सी

ब्लादिमीर पुतिन दुनिया के सबसे ताकतवर राष्ट्राध्यक्षों में गिने जानते हैं..लेकिन अब ऐसा कहा जा रहा है कि पुतिन अब ज्यादा दिन तक रशिया के राष्ट्रपति नही रह पायेंगे.. इसके पीछे कोई राजनीतिक हालात नही है बल्कि ब्लादिमीर पुतिन का कार्यकाल तो 2036 तक है.. मतलब ब्लादिमीर पुतिन रशिया के राष्ट्रपति 2036 तक रह सकते हैं लेकिन अब ये बात बड़े जोर शोर से उठ रही है कि अगले साल तक ब्लादिमीर पुतिन अपना पद छोड़ सकते हैं…

दरअसल कहा जा रहा है कि ब्लादिमीर पुतिन एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं. जिसका नाम है पार्किंसंस पार्किंसंस एक तरह की न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसमें शरीर में कंपन, चलते या बोलते हुए तालमेल बिठाने में परेशानी और आंखों का कहीं फोकस न हो पाना जैसी समस्याएं होती हैं. शरीर की ऊंगलियों जैसे हिस्से से शुरू होते हुए बीमारी जल्दी ही पूरे शरीर को गिरफ्त में ले लेती है. बीमारी बढ़ने के साथ लक्षण गंभीर होते जाते हैं .. हालात तो ऐसे  हो जाते हैं कि इस बीमारी में इंसान अपने रोजमर्रा की आदते भी भूलने लगता है. इस बीमारी के दौरान मस्तिष्क में पाई जाने वाली तंत्रिका कोशिकाएं, जिन्हें न्यूरॉन्स भी कहते हैं, ये धीरे-धीरे मरने लगती हैं. इसी वजह से शरीर की मांसपेशियों का काम करना बंद होने लगता है. आमतौर पर 60 साल के ऊपर की उम्र में ही ये बीमारी देखने में आती है. रूसी राष्ट्रपति पुतिन की आयु 68 साल हो चुकी है. ऐसे में हो सकता है कि कहीं इन दावों में सच्चाई हो..

वैसे ब्लाम्दिर ब्लादिमीर पुतिन की बीमारी के दावे को और हवा इसलिए भी मिल जाती है कक्योंकि कुछ वेक पहले रूस की संसद में एक प्रस्ताव पास किया  जिसमें या कहा गया है कि पुतिन को न केवल पूरे जीवन सारी सुविधाएं मिलें, बल्कि लीगल इम्युनिटी भी मिल जाएगी. बता दें कि लीगल इम्युनिटी एक टर्म है, जिसके तहत किसी शख्स को आपराधिक कार्रवाई से जीवनभर के लिए छूट मिल सकती है. अब सवाल यही खड़ा हो रहा है कि जब  ब्लादिमीर पुतिन  साल 2036 तक रूस के राष्ट्रपति बन रहेंगे तो उन्हें अपने लिए ऐसा कानून क्यों लाना पड़ा?

वैसे माना जा रहा है कि पुतिन अगले साल जनवरी या बाद कभी भी अपना पद छोड़कर किसी प्रतिनिधि को नियुक्त कर सकते हैं. वैसे पुतिन अकेले नहीं, दुनिया की कई जानी-मानी हस्तियां पार्किंसंस बीमारी का शिकार हो चुकी हैं. दुनिया बड़े मुक्केबाजों में से एक मोहम्मद अली को यही बीमारी थी, जिससे 74 साल की उम्र में उनका निधन हुआ. अमेरिका के 41वें राष्ट्रपति एच डब्ल्यू बुश को भी साल 2012 में वस्कुलर पार्किंसंस की पुष्टि हुई.