“मानसिक स्वास्थ को ठीक रखने के लिए मन का शांत होना जरूरी” – डॉ. कृष्णा दत्त, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी

NAPSWI स्वर दूसरे राष्ट्रीय समाज सेवा कार्य का आयोजन किया जा रहा है. कार्यक्रम के चौथे यानि कि बुद्धवार को भी संस्था द्वारा दो कार्यक्रम आयोजित किये गये. जिसमें कई जाने-मान प्रोफ़ेसर और समाज कार्य से जुड़े कई लोग शामिल हो रहे हैं. बुद्धवार को पहले सेशन में  ‘Social Work Response to Post-Covid Time’ मुद्दे पर चर्चा की गयी. जिसमें प्रो. सुरिंदर जसवाल (पूर्व डीन (रिसर्च), सेंटर फॉर हेल्थ एंड मेंटल हेल्थ, स्कूल ऑफ सोशल वर्क, टीआईएसएस, मुंबई ); प्रो. जी.के. अरोड़ा, प्राचार्य डॉ. बी.आर. अम्बेडकर कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय शामिल हुए.

पहले सेशन में प्रो. सुरिंदर जसवाल ने कोरोना वायरस संक्रमण पर विस्तृत जानकारी देते हुए तमाम बीमारियों के बारे में लोगों को जानकारी दी. इतना ही नही कोरोना वायरस को लेकर किस तरह से लोगों की जिन्दगी प्रभावित हुई है इसके बारे में भी उन्होंने बताया. कोरोना वायरस की दूसरी लहर को लेकर भी प्रो. सुरिंदर ने बात की. हालाँकि सबसे महत्वपूर्ण बात प्रो. सुरिंदर जसवाल द्वारा ये बतायी गयी कि कैसे कोरोना वायरस के प्रभाव के समय कैसे समाज कार्य लोगों की मदद कर सकता है. समाज कार्य से जुड़े लोग कैसे कोरोना से प्रभावित इलाकों में काम कर रहे थे या फिर कैसे कार्य कर सकते हैं.  वहीँ प्रो. जी.के. अरोड़ा, प्राचार्य डॉ. बी.आर. अम्बेडकर कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय ने कई सामाजिक मुद्दों पर अपनी बात रखी. सिर्फ इतना ही नही प्रो. अरोड़ा ने समाज कार्य का कोरोना के बाद क्या अहम् रोल हो सकता है या कोरोना के दौरान क्या रोल रहा इसपर विस्तार से अपनी बात रखी.

वहीँ दूसरे सेशन में e-Workshop on ‘Mental Health and Wellness’ पर चर्चा की गयी. कोरोना के दौरान जहाँ लोग घरों में बंद रहे, नौकरी चली गयी, तमाम परेशानियां आई.. ऐसे में बहुत से लोग मानसिक रूप से परेशान हुए. इन्हीं मुद्दों पर चर्चा के लिए भी NAPSWI कुछ खास मेहमानों को आमंत्रित किया था जिसमें डॉ. कृष्णा दत्त, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ और संस्थापक, अस्मिता ‘- ए सेंटर फॉर स्लो लर्नर; प्रो. कल्पना सारथी, उप निदेशक, गुवाहाटी परिसर और स्कूल ऑफ सोशल वर्क, टीआईएसएस, गुवाहाटी परिसर के डीन भी शामिल हुए.

दूसरे सेशन में प्रो. कल्पना सारथी ने मेंटल हेल्थ को लेकर अपनी बात रखी. किस तरह से मेंटल हेल्थ हमारे लिए कितना जरूरी है, मेंटल हेल्थ के कमजोर होने से किस तरह की परेशानियां होती है इसको लेकर प्रो. कल्पना ने अपनी बात रखी. किस तरह से कोरोना वायरस की वजह से लगे लॉकडाउन में लोग मानसिक रूप से परेशान हुए हैं इसके कई उदहारण देते हुए प्रो. कल्पना ने विस्तुत जानकारी दी. वहीँ डॉ. कृष्णा दत्त, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ और संस्थापक, अस्मिता ‘- ए सेंटर फॉर स्लो लर्नर ने मेंटल हेल्थ यानि कि मानसिक स्वाथ्य को लेकर अपनी बात रखी. उन्होंने कई उदाहरण देकर समझाया कि मानसिक स्वास्थ्य का ठीक रहना कितना जरूरी है. मानशिक स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है कि हम कैसे मन को शांत रखें.
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