क्या है सीटी स्कैन और कैसे काम करता है? जानें इसके बारें में सबकुछ

कोरोना की इस दूसरी लहर में सीटी स्कैन कराने वाले लोगों की तादाद में अचानक से तेजी से बढ़ोतरी हुई है. इस बढ़ोतरी को देखते हुए हाल ही में दिल्ली एम्स के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने चिंता जाहिर की है.रणदीप गुलेरिया ने कहा कि बार-बार सीटी स्‍कैन कराना बड़े खतरे को बुलाना हो सकता है. उन्‍होंने कहा था क‍ि सीटी स्‍कैन से कोरोना मरीजों को कैंसर होने का खतरा भी हो सकता है.ऐसे में आईए आपको बताते है कि आख‍िर सीटी स्‍कैन होता क्‍या है और कोरोना से इसका संबंध क्या है. क्‍यों डॉक्‍टर इसे नुकसानदेह भी बता रहे है.

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सीटी स्कैन क्या है और कैसे काम करता है?

सीटी स्कैन मतलब क्ंप्यूटराइज्ड टोमोग्राफी स्कैन.. आसान शब्दों में समझें तो सीटी स्कैन का मतलब है किसी भी चीज को छोटे-छोटे सेक्शन में काटकर उसका स्टडी करना. कोविड के केस में डॉक्टर जो सीटी स्कैन कराते हैं, वो है एचआरसीटी चेस्ट यानी सीने का हाई रिजोल्यूशन कंप्यूटराइज्ड टोमोग्राफी स्कैन. इस टेस्ट के जरिए फेफड़ों की एक 3डी यानी थ्री डायमेंशनल इमेज बनती है जो बहुत बारीक डिटेल्स भी बताती है.इससे फेंफड़ों का इंफेक्शन जल्दी पता चल जाता है. ये आसानी से बता देता है कि आपके फेफड़ें में किसी तरह का कोई इन्फेक्शन है या नहीं?
आज कल कोरोना को लेकर दो नाम और है जो चर्चा में है और लोग इनके बारे में ज्यादा जानना चाहते है और ये है सीटी स्कोर और सीटी वैल्यू..ये दोनो क्या है आईए जानते है.

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सीटी स्कोर और सीटी वैल्यू कैसे निकाली जाती है?

सीटी वैल्यू यानी साइकिल थ्रेशोल्ड, ये एक नंबर होता है. ICMR ने कोरोना वायरस की पुष्टि के लिए ये संख्या 35 रखी गई है. यानी सीटी वैल्यू 35 निर्धारित की हुई है. डॉक्‍टरों के अनुसार सीटी वैल्यू सामान्‍य से जितनी कम होती है, संक्रमण उतना अधिक होता है और ये जितनी अधिक होती है, संक्रमण उतना ही कम होता है. मतलब ये कि 35 और इससे कम सीटी वैल्यू पर कोरोना पॉजिटिव माना जाता है और 35 या इससे ऊपर सीटी वैल्यू होने पर पेशेंट को कोरोना नेगेटिव माना जाता है.

वही सीटी स्कोर से ये पता चलता है कि इंफेक्शन ने फेफड़ों को कितना हद तक नुकसान पहुंचाया है. इसके लिए भी नंबर निर्धारित किया गया है. इस नंबर को को-रेडस(CO-RADS) कहा जाता है. अगर ये को-रेडस यानी नंबर अधिक है तो फेफड़ों को नुकसान भी अधिक हुआ है और यदि ये नंबर नॉर्मल है तो इसका अर्थ ये है कि फेफडों में कोई नुकसान नहीं हुआ है. बता दें कि यदि को-रेडस का आंकड़ा 1 है तो सब नॉर्मल है, लेकिन यदि को-रेडस 2 से 4 है तो हल्का फुल्का इन्फेक्शन है लेकिन यदि ये 5 या 6 है तो पेशेंट को कोरोना पॉजिटिव माना जाता है.

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बता दें कि हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की एक रिपोर्ट में भी सीटी स्कैन से होने वाले नुकसान का जिक्र किया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि सीटी स्कैन कराते हुए मशीन से निकलने वाले रेडिएशन कैंसर का खतरा उत्पन्न करते हैं. हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दुष्यंत वी. साहनी के अनुसार 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में इसका खतरा कम होता है और उनके शरीर में कैंसर उत्पन्न होने में 20 वर्ष या इससे अधिक समय लग जाता है.
आशा करते है कि आपको इसके बारें में पूरी जानकारी मिल गई होगी….लेकिन आपके मन में फिर भी कोई सवाल हो तो कमेंट करके जरूर बताएं.

ये लेख सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. इन पर अमल करने से पहले संबंधित डॉक्टरों से संपर्क जरूर करें