MRI क्या होता है ?डॉक्टर इस टेस्ट को कोरोना मरीजों को कराने की इजाजत कब देते है?

MRI क्या होता है ?
डॉक्टर ही कोरोना मरीजों को इस जांच की इजाजत दे सकते हैं?
डॉक्टर इस टेस्ट को कराने की इजाजत कब देते है?
खुद अपनी तरफ से इस टेस्‍ट के लिए नहीं जाना चाहिए?

MRI…मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग स्कैन होता है. इस जांच में बॉडी के एक हिस्से का स्कैन किया जाता है. इस जांच में 15 से 90 मिनट लगता है. ये एक्स रे और सीटी स्कैन से बिल्कुल अलग है. क्योंकि ये रेडिएशन के बजाय मैग्नेटिक फील्ड पर काम करता है.

MRI क्‍या है, कोरोना मरीजों को कब दी जा सकती है इस जांच की इजाजत - News  AajTak

रेडियोलॉजिस्ट डॉ संदीप ने बीबीसी को दिए अपने बयान में बताया था कि पूरे शरीर में जहां जहां हाइड्रोजन होता है, उसके स्पिन यानी घूमने से एक इमेज बनती है. हमारे शरीर में 70 फीसदी पानी होता है, इसलिए हाइड्रोजन स्पिन के माध्यम से बने इमेज से शरीर की काफी दिक्कतों का पता लगाया जाता है. इसमें दिमाग, घुटने, रीढ़ की हड्डी जैसे शरीर के अलग अलग हिस्सों में जहां कहीं भी सॉफ्ट टिशू होती है उनका अगर MRI स्कैन होता है तो हाइड्रोजन स्पिन से इमेज बनने के बाद ये पता लगाया जाता है कि शरीर के उन हिस्सों में कोई दिक्कत तो नहीं है.

Open MRI vs. Closed MRI | Health Images

MRI स्कैनर एक मजबूत मैग्नेटिक फील्ड पैदा करता है. जब इंसान को मशीन के भीतर भेजा जाता है उस वक्‍त व्यक्ति के शरीर में किसी भी तरह का मेटल ऑब्जेक्ट नही होना चाहिए.इसमें शामिल है- घड़ी, विग, ज्‍वेलरी, पियर्सिंग, नकली दांत और सुनने की मशीन आदि. यूं तो MRI स्कैन कराने से पहले ये सुनिश्चित किया जाता है कि मरीज़ के पास कोई धातु की चीज़ ना हो लेकिन कई बार अनजाने में गड़बड़ी हो जाती है. ऐसे में शरीर की जांच के लिए MRI करने वाली मशीन ख़तरनाक और जानलेवा साबित हो सकती है. क्योंकि शरीर में मौजूद धातु के ये टुकड़े मैग्नेट बेहद तेज़ गति से खींचेंगे और शरीर को गंभीर चोट पहुंचेगी.

MRI के दौरान एक छोटी सी चूक बन सकती है जानलेवा | Know About After Effects  and Risks of MRI

डॉक्‍टरों का कहना है कि एमआरआई की जांच सिर्फ डॉक्‍टरों की सलाह पर ही कराना चाहिए. डॉक्टर कोरोना मरीजों को इसकी जांच की अनुमति तब देते है जब मरीज में गंध लंबे समय तक नहीं आती, या नींद न आने की समस्‍या लंबे समय तक चलती है या फिर सिरदर्द भी लंबे समय तक रहता है, तभी डॉक्‍टर इस टेस्ट को कराने की इजाजत देते है. ताकि मरीज के मस्‍त‍िष्‍क में कोरोना के प्रभाव का पता लग सके.

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हालांकि वैज्ञानिक अभी तक नहीं जानते कि कोरोना वायरस अन्य वायरसों की तुलना में दिमाग के लिए कितना गंभीर है. लेकिन मरीजों में ये लक्षण काफी देखे जा रहे हैं. इसे लेकर भले ही अनुमान अलग-अलग हैं. लेकिन लगभग 50 प्रतिशत मरीज़ों में जो कोरोना संक्रमित पाए गए हैं, उनमें न्यूरोलॉजिकल परेशानियां देखी जा रही हैं. वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना वायरस सीधे तौर पर भी दिमाग़ पर हमला कर सकता है.