क्या होता है ब्लैक बॉक्स, जिसकी CDS जनरल रावत की मौत के बाद हो रही चर्चा?

देश ने बुधवार को अपना सबसे बड़ा सैन्य अफसर खो दिया. तमिलनाडु के कुन्नूर में बुधवार को हुए हेलिकॉप्टर हादसे में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ  जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी मधुलिका रावत समेत 13 लोगों की मौत हो गई है. हादसे के वक्त सीडीएस जनरल रावत सेना के सबसे सुरक्षित माने जानेवाले चॉपर एमआई-17 वी5 में सवार थे. इस दिलदहला देने वाले हादसे के बाद हर किसी के ज़ेहन में कई तरह के सवाल उठ रहे है कि आखिर ये हादसा कैसे हुआ और इसकी वजह क्या रही?  हालांकि वायुसेना ने इस हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं और जांच शुरू भी कर दी गई है. लेकिन इस बीच सोशल मीडिया पर ब्लैक बॉक्स का जिक्र तेजी से हो रहा है. कहा जा रहा है कि  ब्लैक बॉक्स मिल गया है. ऐसे में आईये जानते है कि ब्लैक बॉक्स आखिरकार होता क्या है और इसका यूज क्या है..ये काम कैसे करता है.

क्या होता है ब्लैक बॉक्स, जिससे होगा हेलिकॉप्टर क्रैश की असल वजह का खुलासा?  | What Is Black Box In Helicopter Which Will Reveal Real Reason Of Incident  - Hindi Oneindia

ब्लैक बॉक्स क्या होता है?

‘ब्लैक बॉक्स’ किसी भी प्लेन का सबसे जरूरी हिस्सा होता है. ब्लैक बॉक्स सभी प्लेन में रहता है चाहें वह पैसेंजर प्लेन हो, कार्गो या फाइटर. ये उड़ान के दौरान विमान से जुडी सभी तरह की गतिविधियों को रिकॉर्ड करने वाला एक उपकरण होता है. इसलिए हमेशा ही दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए ब्लैक बॉक्स को हवाई जहाज में लगाया जाता है. इसी वजह से इसे फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर (FDR) भी कहते हैं. आम तौर पर इस बॉक्स को सुरक्षा की दृष्टि से विमान के पिछले हिस्से में रखा जाता है. ये सुरक्षित रहे इसके लिए इसे सबसे मजबूत धातु टाइटेनियम से बनाया जाता है और साथ ही टाइटेनियम से ही बने डिब्बे में बंद होता है. ताकि कभी किसी दुर्घटना के होने पर भी ब्लैक बॉक्स सेफ रहे और उससे समझा जा सके कि असल में हुआ क्या था.

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‘ब्लैक बॉक्स’  काम कैसे करता है?

ब्लैक बॉक्स में वॉयस रेकॉर्डर होता है जिसमें सारी बातें रेकॉर्ड होती हैं. पायलट लगातार कंट्रोल रूम के संपर्क में होता है. जो भी बातें होती हैं वह ब्लैक बॉक्स में रेकॉर्ड होती हैं. हादसे से पहले क्या बात हुई, क्या पायलट ने बताया यह सब पता चल पाता है. इसकी एक और मजेदार बात यह है कि यह 14000 फीट गहरे समुद्री पानी के अन्दर से भी संकेतक भेजता रहता है. साथ ही अगर प्लेन में आग भी लग जाए तो भी इसके खत्म होने की आशंका लगभग नहीं के बराबर होती है क्योंकि लगभग 1 घंटे तक ये 10000 डिग्री सेंटीग्रेट का तापमान ये सह पाता है. इसके बाद भी अगले 2 घंटों तक ये बॉक्स लगभग 260 डिग्री तापमान सह सकता है. इसकी एक खासियत ये भी है कि ये लगभग महीनेभर यानी 30 दिनों तक बिना बिजली के भी काम करता है यानी अगर दुर्घटनाग्रस्त जहाज को खोजने में वक्त लग जाए तो भी बॉक्स में डाटा सेव रहता है.

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ऐसे में सीडीएस जनरल रावत के दुर्घटनाग्रस्त हुए भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टर का फ्लाइट रेकॉर्डर यानी ‘ब्लैक बॉक्स’ बरामद हो गया है. ब्लैक बॉक्स घटनास्थल से कुछ मीटर की दूरी पर मिला है। अंदाजा है कि दुर्घटना के बाद यह ब्लैक बॉक्स छिटकर दूर जा गिरा होगा. लेकिन बताया जा रहा है कि इसकी कंडीशन अच्छी नहीं है. हालांकि उम्मीद है कि इसके मिलने के बाद इसके अंदर जो डाटा रिकॉर्ड होगा, उससे पता चलेगा कि किन स्थितियों में और कैसे ये दुर्घटना हुई.