बिजली संकट का क्या है पूरा मामला ? यहां आसान भाषा में पढ़े…

बीते कुछ दिनों से खबर चल रही है की आने वाले दिनों में देश भर से बत्ती गुल हो सकती है..यानी घर या ऑफिस में आप जिन लाइटों के उजाले में रहते है..जिस एसी-फैन का आप इत्तेमाल करते है वो सब बंद हो जाएंगा, क्योंकि आपके घर तक बिजली पहुंचेगी ही नहीं..तो क्या आपके घर में दिवाली के दिन भी लाइट नहीं होगी..क्या पूरा देश अंधेरे में चला जायेगा..यही बहस और यही सवाल इन दिनों देश भर में चल रहा है. इसको लेकर केंद्र और राज्य सरकारें आमने-सामने है..दोनों की दलीले अलग-अलग है..तो क्या है ये पूरा मामला, इस वीडियो में जानेंगे और इससे जुड़े उठ रहे सारें सवालों के जवाब भी.

Coal Crisis : देश में कोयले का सिर्फ 4 दिन का स्टॉक; बिजली संकट से अंधेरे  में डूब सकता है भारत, ठप हो सकती हैं फैक्ट्रियां - The Financial Express

वैसे अब तक आपने खबर पढ़ी होगी तो ये जरूर पढ़ लिया होगा की जो बिजली की कटौती की बात सामने आ रही है उसकी वजह कोयले की कमी को बताई जा रही है. क्योंकि देश की 70 फीसदी बिजली, कोयले से चलने वाले पावर प्लांट्स से ही बनती है. ऐसे में साफ है कि अगर कोयले की कमी होती है तो बिजली की कटौती तय है. लेकिन इन सब के बीच देश में कोयला संकट और बिजली कटौती को लेकर सियासत भी तेज हो गई है. राज्य सरकारें कोयला संकट को लेकर जहां केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहीं हैं तो वहीं केंद्र का मानना है कि ये संकट राज्यों की वजह से खड़ा हुआ है. 9 अक्टूबर को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बिजली संकट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी थी. उन्होंने पावर स्टेशनों को कोयला उपलब्ध कराने की मांग की थी, ताकि दिल्ली में बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित हो सके. पंजाब-महाराष्ट्र ने भी दावा किया है कि कोयले की कमी से उनके कई पावर प्लांट बंद हो चुके हैं. उत्तर प्रदेश और बिहार से भी बिजली कटौती की खबर मिल रही है.

Coal shortage : Power crisis may deepens in Delhi Arvind Kejriwal expresses  concern by writing a letter to PM Modi - कोयले की कमी : दिल्ली में गहरा  सकता है बिजली संकट,

हालांकि केंद्र सरकार ने सारे दावों को खारीज करते हुए कहा है कि कोयले की कोई कमी नहीं है और ना ही बिजली की कटौती की जाएंगी. इसको लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को बिजली मंत्री आरके सिंह और कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी के साथ बैठक भी की थी. जिसके बाद सरकार ने राज्यों और बिजली कंपनियों को भरोसा दिलाया है कि वह कोयले की मांग को पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार है. उनका कहना है कि सरकार एक सप्ताह के भीतर रोज के कोयला उत्पादन को 19.4 मिलियन से बढ़ाकर 2 मिलियन टन कर रही है.

केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने भी बीते रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोयले का संकट होने की बात खारिज कर दी थी. हालांकि, उन्होंने ये बात जरूर मानी थी कि पहले जहां प्लांट में 17-17 दिन का स्टॉक हुआ करता था, वहां अब 4-5 दिन का ही स्टॉक है. जबकि नियम ये है कि सभी पावर प्लांट्स को कम से कम 20 दिनों का कोयला भंडार रखना होता है. लेकिन इस बार ऐसा नहीं है इसको लेकर सरकार कई वजहें गिना रही है-

Power Crisis: 72 Thermal Plants Have Coal For Only Three Days, China Like  Situation Can Be Made In The Country - बिजली संकट: 72 थर्मल संयंत्रों के  पास सिर्फ तीन दिन का

​सरकार का कहना है कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर के कमजोर होने के साथ ही भारत समेत पूरी दुनिया में बिजली की मांग तेजी से बढ़ी. इसके चलते वैश्विक स्तर पर कोयले की कीमतों में 40 प्रतिशत इजाफा हुआ. कोयले की किल्लत की एक बड़ी वजह मॉनसून को भी बताया जा रहा है. मानसून सीजन की बारिश की वजह से देश में कोयला खदानों में पानी भर गया जिससे कोयले का प्रोडशन प्रभावित हुआ. गांवों के विद्युतीकरण और औद्योगीकरण ने भी कोयले की मांग को बढ़ा दिया है. वही भारत का 20 लाख टन कोयला चीन के पोर्ट पर महीनों से फंसा हुआ है, जो की भारत ने ऑस्ट्रेलिया से मंगाया था.

सरकार से जुड़े करीबी सूत्रों का दावा है कि अगर राज्यों ने कोल इंडिया के भंडार से अपना कोटा हटा लिया होता तो इस संकट को टाला जा सकता था.  कोल इंडिया एक लिमिट तक कोयले को स्टॉक कर सकती है. अगर लिमिट से ज्यादा कोयले का स्टॉक करते हैं तो आग लगने का खतरा रहता है.  खबर ऐसी भी है कि राजस्थान, पश्चिम बंगाल और झारखंड की अपनी खदानें हैं लेकिन उन्होंने कोयला निकालने के लिए कुछ नहीं किया. कोयला मंत्रालय जनवरी से ही राज्यों में कोयला स्टॉक करने के लिए पत्र लिख रहा है, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया.केंद्र सरकार मौजूदा स्थिति के लिए इन्ही सब वजहों को जिम्मेदार ठहरा रही है. हालांकि सरकार का कहना है कि जल्द ही इस संकट को दूर कर लिया जाएगा.