विश्व जनसंख्या दिवस : क्या आप जानते हैं साल 2025 तक कितनी होगी दुनिया की जनसख्या? पढ़िए ये ख़ास रिपोर्ट

दुनिया भर की जनसंख्या 7 अरब से अधिक हो चली है. ये जनसंख्या लगातार बढती जा रही है कहा जा रहा है कि साल 2025तक दुनिया की जनसख्या को करीब 8 अरब तक पहुँचने की संभावना है. आइये जनसख्या दिवस पर जानते हैं कि इससे जुडी कुछ ख़ास जानकारी..

आपको बता दें कि आज भी दुनिया की बड़ी आबादी अपनी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहते हुए ही जीवन यापन करती है। संयुक्‍त राष्‍ट्र के मुताबिक दुनिया में एक अरब से ज्यादा लोगों को पानी उपलब्ध नहीं है।

प्रदूषित पानी की वजह से हर साल होने वाली लाखों मौतों पर विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि यदि लोगों को पीने का साफ पानी और सेनिटेशन की उचित व स्तरीय सुविधाएं मुहैया की जाएं दुनिया में बीमारियों से पड़ने वाले बोझ को 9 फीसदी और भारत समेत दुनिया के 32 सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में 15 फीसदी तक कम किया जा सकता है.

वहीँ कई देशों में मचे बवाल की वजह लाखों लोग अपना देश छोड़कर शरणार्थी बन चुके है. रिपोर्ट की माने तो 46 लोग तो सिर्फ अफगानिस्तान से विस्थापित हो चुके हैं. दुनियाभर के कुल शरणार्थियों में आधे से ज्‍यादा सीरिया, अफगानिस्‍तान, दक्षिण सूडान, म्यांमार और सोमालिया से आते हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट की माने तो 2018 में पलायन करने वालों की संख्या 1।3 करोड़ थी वहीँ 2017 की तुलना में यह आंकड़ा करीब 27 लाख ज्यादा था।

वहीँ देश छोड़कर शरणार्थी बनने वाले लोग वापस स्वदेश लौटने की हिम्मत नही जुटा पाते. यूएन के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2017 में 6,67,400 लोग अपने देश लौटे थे वहीं वर्ष 2018 में इनका आंकड़ा 5,93,800 था। गृहयुद्ध की मार झेल रहे सीरिया की बात करें तो वहां पर 2,10,000 लोगों ने वापस जाने की हिम्मत दिखाई। वहीँ शरणार्थी बने लोगों में बच्चों की स्थिति दयनीय हो जाती है. वे कई देशों में मानव तस्करों के चंगुल में फंस जाते हैं..आपको जानकारी हैरानी होगी कि 1997 में रूस में विघटन के दौरान करीब 175,000 महिलाओं को देह व्‍यापार के धंधे में धकेलने के लिए बेचा गया था वही यूएन की रिपोर्ट के मुताबिक हर वर्ष करीब 40 लाख लोगों को उनकी इच्‍छा के विरुद्ध दूसरे धंधों के लिए बेचा जाता है। इनमें अधिकतर कम उम्र की महिलाएं होती हैं।

विश्व जनसख्या दिवस पर सिर्फ आकड़े देखने से भी बात पूरी नही हो जाती है… आज के समय में जहाँ कोरोना वायरस तबाही मचा रहा है वहीँ लाखों लोग बेरोजगार हो चुके हैं.. ये हाल लगभग सभी देशों का है.

जनसख्या देशो को आगे बढाने में मदद करती है लेकिन कोरोना के इस काल में बड़ी संख्या में बेरोजगारी का शिकार हो गये हैं. उनके पास काम नही है, काम नही होने से पैसे नही है और पैसे न होने की वजह से गरीबी के शिकार हो रहे हैं. विश्‍व की बढ़ती आबादी में एशिया का सबसे बड़ा योगदान है। आबादी तो बढती जा रही है लेकिन संसाधन सीमित है. बढती जन सख्या से संशाधनों की खपत बड़ी है और प्राकृतिक संतुलन भी बिगड़ता जा रहा है.

भारत में जनसख्या कानून को बनाये जाने की मांग रही रही है लेकिन अभी ऐसा कोई कानून देश में लागू नही हो पाया है. सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारत में प्रति हजार पर सबसे कम जन्मदर केरल में 13.9 है। तमिलनाडु में जन्मदर 14.7 है। ये राज्य बच्चियों की पढ़ाई में भी आगे हैं। 2011 में महिला साक्षरता में सबसे पिछड़े तीन राज्यों राजस्थान (52.7), बिहार (53.3), उत्तर प्रदेश (59.5) थे। राजस्थान में जन्मदर 23.2, बिहार में 25.8 व उत्तर प्रदेश में 24.8 है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वर्ल्ड पॉपुलेशन एंड ह्यूमन केपिटल इन ट्वेंटी फर्स्ट सेंचूरी स्टडी के अनुसार, हर लड़की और लड़के को 10वीं तक नियमित शिक्षा मिले तो 2050 में दुनिया की आबादी 150 करोड़ कम के स्तर पर होगी। यूएन के अनुसार 2050 में दुनिया की आबादी 980 करोड़ होगी।

जनसख्या अर्थव्यवस्था के वरदान हो सकती है लेकिन धरती के लिए अभिशाप भी हो सकती है.