कांग्रेस,आप और बीजेपी के लिए दिल्ली चुनाव का मुख्य मुद्दा क्या था? यहां पढ़ें…

दिल्ली विधानसभा चुनाव के प्रचार का शोर 6 फरवरी की शाम पांच बजे थम गया.अब 8 फरवरी को वोटिंग होने वाली है.और दिल्ली की जनता दिल्ली किसको सौंपती है ये 11 फरवरी को पता चल जाएगा..फ़िलहाल, राजनीतिक पार्टियाँ प्रचारप्रसार खत्म करने के बाद. अब डोरटूडोर कैंपेन में जुट गई है.6 जनवरी को दिल्ली में चुनाव की औपचारिक घोषणा हुई थी जिसके बाद से राजनीतिक पार्टियां चुनाव प्रचार अभियान में जूट गई. एक महीने तक चले चुनाव प्रचार के दौरान इन प्रमुख राजनीतिक दलों के क्या मुद्दे रहे है.किन मुद्दों पर ये राजनीतिक पार्टोयां चुनाव अभियान में उतरी. इस चुनाव प्रचार के दौरान क्या कुछ हुआ.इस वीडियो में हम आपको ये सारी बाते बताने जा रहे है. इस चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी, बीजेपी और कांग्रेस ने चुनाव प्रचार का आग़ाज़ विकास कार्यों के साथ शुरु की..लेकिन जैसेजैसे चुनाव अपने सियासी परवान चढ़ने लगा तो सारा फ़ोकस कुछ मुद्दों पर ही सिमट कर रह गया.

इस बार दिल्ली चुनाव प्रचार के दौरान जो मुद्दे छाए रहे उनमें शाहीन बाग का धरना, जामिया हिंसा,मुफ्त की चुनावी घोषणाएं, सीएम का चेहरा, देशभक्त Vs टुकड़ेटुकड़े गैंग, केजरीवाल के 5 साल का काम, नागरिकता संशोधन कानून, राम मंदिर, दिल्ली में प्रदूषण, अनअधिकृत कॉलोनियां, झुग्गी बस्तियां और पूर्वांचल वोटरों के मुद्दे पूरे दिल्ली चुनाव प्रचार के दौरान गूंजते रहे..तो चलिए इसी कड़ी में सबसे पहले जानते है कि केजरीवाल सरकार किन मुद्दों पर दिल्ली चुनाव के लिए प्रचार करने उतरी..

केजरीवाल का मुफ्त चुनावी एजेंडा

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आम आदमी पार्टी ने चुनाव प्रचार के दौरान केजरीवाल सरकार के 5 साल के काम को गिनाया और अपना चुनावी कैंपेन शुरु किया..इनमें मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बिजली, पानी, महिलाओं के लिए बसोंमेट्रो की यात्रा फ्री करने के कामों को मुद्दा बनाया. साथ ही अपने स्कूल के काम, मोहल्ला क्लीनिक,डेढ़ लाख सीसीटीवी कैमरे लगाने,अनअधिकृत कॉलोनियां समेत विकास कार्यों को चुनाव प्रचार में मुख्य मुद्दा बनाने की कोशिश की. चुनाव प्रचार के दौरान सीएम केजरीवाल ने कहा था कि अगर हमने काम किया है तो ही हमें वोट देना.वही, आम आदमी पार्टी शाहीन बाग़ मुद्दे से बचती रही तो कांग्रेस सीएएएनआरसी के ख़िलाफ़ विरोध के साथ खड़ी रही

बीजेपी का शाहीन बाग़ पर फोकस

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भाजपा ने दिल्ली चुनाव में शाहीन बाग़ में सीएएएनआरसी के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन पर आक्रमण रुख़ अख्यियार किया.चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी से लेकर गृह मंत्री अमित शाह, योगी आदित्यनाथ, नीतिश कुमार समेत तमाम बीजेपी नेताओं ने प्रचार में शाहीन बाग़ का मुद्दा जोड़ों शोरों से उठाया. वहीं, बीजेपी ने अपने फ़ैसले से नहीं हटने की क़समें खा ली और लोगों को समझाने के लिए डोर टू डोर जाकर सीएए को समझाया.यही नहीं, बीजेपी ने  सीएए के समर्थन में कई जनसभाओं का आयोजन भी किया और लोगों को इसके प्रति जागरूक करने की कोशिश की.हालांकि, चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी ने भले ही फ्री सुविधाओं की घोषणा कम की हो, लेकिन बिजली और पानी के लिए दी जा रही मुफ्त सुविधा बंद नहीं करने की बात जरूर की है. वहीं, कांग्रेस ने आम जनता को प्रति माह 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली और 20 हजार लीटर मुफ्त पानी देने का वादा किया है.

शीला वाली दिल्लीको लेकर कांग्रेस प्रचार में उतरी

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कांग्रेस दिल्ली में शीला दिक्षीत सरकार का सहारा लेते हुए चुनाव प्रचार में उतरी.कांग्रेस नेशीला वाली दिल्लीका टैगलाइन जारी कर अपने चुनावी अभियान की शुरुआत कीकांग्रेस ने अपने चुनावी प्रचार कैंपेन शीला दीक्षित सरकार के विकास कार्यों को लेकर फोकस किया. कांग्रेस नेताओं ने शाहीन बाग में जाकर प्रदर्शनकारियों को अपना समर्थन दिया था. इस तरह से शाहीन बाग का धरना दिल्ली के चुनावी मुद्दे में छाया रहा. सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान जामिया में हुई हिंसा भी प्रमुख चुनावी मुद्दा बना. कांग्रेस और आम आदमी पार्टी जामिया हिंसा को लेकर लगातार गृहमंत्री अमित शाह पर सवाल खड़े करती रहीं

अब दिल्ली की जनता इन तीन प्रमुख दलों के भाग्य का फैसला करेंगी. चुनाव आयोग ने चुनाव के सुचारू संचालन के लिए 90,000 से अधिक अधिकारियों को तैनात करने का निर्णय लिया है.जान ले कि लोगों को सुविधा देने के लिए, दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन यानी की DMRC ने घोषणा की है कि 8 फरवरी को अपने सामान्य समय के बजाय सुबह 4 बजे सेवाएं शुरू करेगी. इससे मतदान अधिकारियों और मतदाताओं को समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचने में मदद मिलेगी