आकाशीय बिजली कहाँ सबसे ज्यादा गिरती है? कैसे लगाया जाता है पूर्वानुमान

बारिश के मौसम में अक्सर आपने आसमान से आकाशीय बिजली को गिरते हुए देखा होगा. इस बिजली के गिरने से हर साल भारत में ही हजारों लोगों की मौत हो जाती है. पूरी दुनिया में कुछ ख़ास हिस्से ऐसे हैं जहां पर आसमान से बिजली गिरने की घटनाएँ बेहद आम  होती है. जैसे उत्तर भारत में बिजली गिरने की घटनाएँ सबसे अधिक होती है.

दुनिया में हर साल बिजली गिरने की करीब 2 लाख 40 हज़ार घटनाएं दर्ज होती हैं. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की मानें तो सिर्फ भारत में ही हर साल लगभग 2000 लोग बिजली गिरने से मारे जाते हैं. अध्ययन के मुताबिक 2019 में देश में बिजली गिरने से करीब 1300 मौतें दर्ज हुईं.

दुनिया में जिस जगह बिजली संबंधी सबसे ज़्यादा घटनाएं होती हैं, वह हॉटस्पॉट दक्षिण अमेरिका के वेनेज़ुएला में स्थित लेक मैराकाइबो है. इस हॉटस्पॉट पर बिजली चमकने की दर का घनत्व 232.52 है. इस दर का मतलब यह है कि हर साल हर वर्ग किलोमीटर के दायरे में 232.52 बार बिजली गड़गड़ाती है.

इसके अलावा मध्य अफ्रीका के कांगो, दक्षिण अमेरिका, हिमालय क्षेत्र मतलब भारत, पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश, सेंट्रल फ्लोरिडा जिसे ‘बिजली वीथिका’ भी कहा जाता है अर्जेंटीना व कोलंबिया, इंडोनेशिया व मलेशिया में बिजली गिरने की घटनाएँ बड़े पैमाने पर होती है.

अब सवाल ये है कि कैसे पता किया जाता है कि कहाँ पर बिजली गिरने वाली है.

वैसे हम जानते हैं कि आकाशीय बिजली बारिश के मौसम में गिरती है लेकिन ऐसा नही है. भारतीय उपमहाद्वीप में ज़्यादातर घटनाएँ अप्रैल से जुलाई के बीच होती हैं. आकाशीय बिजली गिरने की संभावनाओं को दो तरह से पता किया जाता है.

पहला है इंटर क्लाउड (IC) और दूसरा है बादल से ज़मीन पर गिरने वाली बिजली (CG). CG जानलेवा या बेहद नुकसानदायक होती है जबकि IC से जानोमाल का नुकसान नहीं होता. वहीं, CG बेहद खतरनाक होती है. ये कितना खतरनाक होता है इसका अंदाजा इसी बात से लगा लीजिये कि आठ करोड़ मोमबत्तियां को एक साथ में जलाने जितनी रोशनी पैदा होता है जो आंखें खराब कर सकती है और इतना ताप झुलसाने से लेकर राख कर देने के लिए काफी होता है.

वैसे बिजली गिरने की घटनाओं को सेंसर के जरिये पता किया जाता है. और इसका पूर्वानुमान जारी किया जाता है… सेंसर के जरिये आधे घंटे पहले बिजली गिरने की संभवाना पता चल जाती है लेकिन एडवांस सिस्टम के जरिये करीब तीन से चार घंटे पहले बिजली गिरने की सम्भावना पता चल जाती है. आधुनिक तकनीक के ज़रिये कई एप्स बनाये गये हैं. इन एप्स के ज़रिये पूर्वानुमान पाए जा सकते हैं, जो सैटेलाइट के डेटा के माध्यम से लगाए जाते हैं.

सरकारी एप्प भी है दामिनी जिसपर मौसम विभाग पूर्वानुमान जारी करता है लेकिन ग्रामीण इलाकों पर अलर्ट पहुँच नही पाता और लोग अलर्ट जारी होने के बाद भी आकाशीय बिजली के शिकार हो जाते हैं.