जानिए कौन हैं NDA की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू, रह चुकी हैं झारखंड की राज्यपाल

बीजेपी ने अपने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर दिया है। इस पद के लिए बीजेपी ने झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद के लिए एनडीए का उम्मीदवार बनाया है। बता दे की आगामी 18 जुलाई को राष्ट्रपति पद के लिए चुंनाव होना है और 21 जुलाई को वोटो की गिनती की जाएगी। ओडिशा की आदिवासी मूल की मुर्मू का सामना पूर्व बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा से होगा जिन्हें विपक्ष ने अपना साझा उम्मीदवार बनाया है। द्रौपदी मुर्म यदि राष्‍ट्रपति पद का चुनाव जीतती है तो वे देश की पहली आदिवासी और दूसरी महिला राष्‍ट्रपति  होंगी। आइये जानते है कौन है द्रौपदी मुर्मू और उनके राजनैतिक सफर के बारे में 

कौन हैं द्रौपदी मुर्मू?

द्रौपदी मुर्मू एनडीए का आदिवासी चेहरा हैं। वह झारखंड की पहली आदिवासी और महिला राज्यपाल (2015-21) रह चुकी हैं। द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के एक गांव बैडापोसी में हुआ। उनके पिता का नाम बिरांची नारायण तुडू था और वे वे संथाल आदिवासी समुदाय से सम्बन्ध रखती हैं। द्रौपदी का बचपन गरीबी और अभावों के बीच बीता। ऐसी स्थिति में भी संघर्ष करते हुए उन्‍होंने ऊंचाइयों को छुआ। उन्‍होंने भुवनेश्वर के रामदेवी वीमन्स कॉलेज से बीए की पढ़ाई की।  उनके पिता का नाम बिरांची नारायण तुडू था. वहीं पति का नाम श्याम चरण मुर्मू था. उनकी एक बेटी है जिनका नाम इतिश्री मुर्मू है। वे सिंचाई और बिजली विभाग में 1979 से 1983 तक जूनियर असिस्‍टेंट के तौर पर काम कर चुकी हैं। वर्ष 1994 से 1997 तक उन्‍होंरे रायरंगपुर के श्री अरबिंदो इंटीगरल एजुकेशन सेंटर में ऑनरेरी असिस्‍टेंट टीचर के तौर पर भी सेवाएं दीं।

1997 में शुरू की राजनीति 

उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1997 में की थी और तब से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। द्रौपदी मुर्मू 1997 में ओडिशा के राजरंगपुर जिले में पार्षद चुनी गईं। वह वाइस चेयरपर्सन भी रहीं। उसी वर्ष मुर्मू भाजपा की ओडिशा इकाई के अनुसूचित जनजाति मोर्चा की उपाध्यक्ष भी बनीं। 

कैबिनेट मंत्री रह चुकी हैं 

उन्‍होंने मार्च 2000 से कई 2004 तक राज्‍य के वाणिज्‍य व परिवहन तथा मत्‍स्‍य और पशु संसाधन विकास विभाग के मंत्री का पद संभाला।

 । 2002 से 2009 तक और फिर 2013 में मयूरभंज के भाजपा जिलाध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया। वह ओडिशा में दो बार भाजपा की विधायक रही हैं और नवीन पटनायक सरकार में कैबिनेट मंत्री भी थीं। उस समय ओडिशा में बीजू जनता दल और भाजपा की गठबंधन सरकार चल रही थी। ओडिशा विधानसभा ने द्रौपदी मुर्मू को सर्वश्रेष्ठ विधायक के लिए नीलकंठ पुरस्कार से सम्मानित किया। द्रौपदी मुर्मू ने ओडिशा में भाजपा की मयूरभंज जिला इकाई का नेतृत्व किया और ओडिशा विधानसभा में रायरंगपुर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। 

झारखण्ड की राज्यपाल रह चुकी है 

द्रौपदी मुर्म झारखंड की ऐसी पहली राज्‍यपाल थीं जिन्‍होंने वर्ष 2000 में इस राज्‍य के गठन के बाद पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा किया। 2015 में  उन्हें झारखंड का गवर्नर नियुक्त किया गया। वे देश की पहली ट्राइबल नेता हैं जिन्हें भारत के किसी राज्य का गवर्नर बनाया गया था।   उन्‍होंने वर्ष 2015 से 2021 तक झारखंड के राज्‍यपाल का पद संभाला। बतौर राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू झारखंड के जनजातीय मामलों, शिक्षा, कानून व्यवस्था, स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर हमेशा सजग रहीं। 

संघर्ष भरा रहा जीवन 

द्रौपदी मुर्मू का जीवन संघर्ष से भरा रहा है। वे ऐसे सुदूर इलाकों में पली-बढ़ीं जहां ठीक से विकास नहीं हुआ था। इसके बावजूद उन्होंने उच्च सीखा हासिल की। उनका प्रोफेशनल और राजनैतिक करियर अच्छा रहा। उनके पति की मृत्यु के बावजूद अपने समुदाय के लिए काम करने का उनका संकल्प अडिग था। उन्हें आदिवासी समुदाय के उत्थान के लिए काम करने का 20 साल का अनुभव है।