कोरोना वैक्सीन लेने के बाद भी क्यों संक्रमित हो रहे हैं डॉक्टर? क्या कहते हैं इस पर एक्सपर्ट

पूरे देश में कोरोना की वैक्सीन लगाईं जा रही है.. वैक्सीन की दोनों डोज लेने के बावजूद भी कई लोग कोरोना से बाख नही पा रहे हैं. ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि कोरोना की वैक्सीन लेने के बाद भी हम कोरोना से नही बच पा रहे हैं तो क्या कोरोना की वैक्सीन असरदार है या नही?
दरअसल कोरोना वैक्सीन लेने के बाद सबसे जायदा कोरोना से संक्रमित होने के मामले डॉक्टरों से जुड़े हुए सामने आ रहे हैं.. हाल ही में लखनऊ स्थित किंग जोर्ज मेडिकल कॉलेज से ४० से अधिक डॉक्टरों के कोरोना से संक्रमित होने की बात सामने आई.. हैरानी तो तब हुई जब ये पता चला कि इन्होने वैक्सीन की दोनों डोज पहले ही ली थी.
दरअसल अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज यूनिवर्सिटी (KGMU) के वाइस चांसलर लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. बिपिन पुरी को वैक्सीन की दो डोज़ लेने के 11 दिन बाद दोबारा कोरोना हो गया. इसके बावजूद पुरी का कहना है कि हर किसी को वैक्सीन लेनी चाहिए. KGMU में पुरी के अलावा यहां के सुप्रिटेंडेट और कम्युनिकेबल डिजीज के स्पेशलिस्ट डॉक्टर हिमांशु भी वैक्सीन की दो डोज़ लेने के बाद कोरोना से संक्रमित हो गए.
वहीँ संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGIMS) के डायरेक्टर डॉक्टर आरके धीमान और उनकी पत्नी को भी वैक्सीन की दो डोज़ लेने के बावजूद कोरोना से संक्रमित हो गये. हालांकि इसके बावजूद डॉक्टर धीमान लोगों को वैक्सीन लेने की सलाह दे रहे हैं. बिहार में 26 से अधिक डॉक्टर टीका लगवाने के बाद भी कोरोना का शिकार हो गए.. इन सभी ने कोरोना की वैक्सीन की दोनों डोज ली थी..

तो क्या वैक्सीन लेने का कोई फायदा नही है? वैक्सीन लेने के बाद जब कोरोना हो रहा तो भी वैक्सीन लेने के लिए क्यों कह रहे हैं डॉक्टर?

दरअसल डॉक्टर का कहना है कि कोरोना की वैक्सीन लेने के बाद अगर आपको कोरोना हो जाता है तो आप अस्पताल में भर्ती होने से बच सकते हैं. स्थिति गम्भीर होने से बच सकती है. इसके अलावा इससे मौत की दर भी घट जाती है. उन्होंने कहा कि टीकाकरण के बाद आप अस्पताल में भर्ती होने से बच सकते हैं. इसके अलावा इससे मौत की दर भी घट जाती है.
AIIMS के डायरेक्टर डॉक्टर रणदीप गुलेरिया  ने बताया कि आखिर क्यों कई लोगों को वैक्सीन की दो डोज लेने के बाद भी कोरोना हो रहा है? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, वैक्सीन लेने के बाद में लोग कोरोना से संक्रमित हो रहे हैं, लेकिन अगर ऐसे लोग कोरोना की चपेट में आते हैं तो उन पर इस वायरस का असर कम दिखेगा. वो गंभीर रूप से बीमार नहीं होंगे. उनमें हल्के लक्षण हो सकते हैं. उन्हें आईसीयू की जरूरत नहीं पड़ेगी. इसके अलावा ऐसे लोगों की मौत होने की आशंका भी कम है.’
एम्स के कोविड एक्सपर्ट डॉक्टर नीरज निश्चल ने कहा कि वैक्सीन का प्राइमरी रोल संक्रमण होने के बाद उसे बीमारी में बदलने से रोकना है। अगर किसी ने वैक्सीन ली है, इसके बाद भी उन्हें संक्रमण होने की संभावना है। लेकिन ऐसे लोग बीमार नहीं होंगे। आसान शब्दों में समझें तो संक्रमित होना और बीमार होना, दो अलग-अलग बातें हैं। कई लोग ऐसे हैं जो संक्रमित होते हैं लेकिन उनमें बीमारी गंभीर नहीं होती है। कुछ लोग काफी गंभीर बीमार हो जाते हैं। यहां पर  अहम हो जाता है वैक्सीन का रोल। वैक्सीन लगी होगी, तो वह संक्रमण को गंभीर नहीं होने देगी। न सिर्फ कोरोना वैक्सीन, बल्कि दुनिया में जितनी भी वैक्सीन हैं, सबका प्राइमरी रोल यही है।

डॉक्टर नीरज ने कहा कि वैक्सीन लेने के बाद कोई संक्रमित होता है, तो उसे तो बीमारी गंभीर नहीं होगी, लेकिन उसकी वजह से संक्रमण बाकी लोगों को हो सकता है। डॉक्टर ने कहा कि जब तक यह महामारी है, तब तक वैक्सीन के साथ-साथ सोशल डिस्टेंसिंग भी जरूरी है। इससे डबल प्रोटेक्शन मिलेगा।