तौकते तूफ़ान के बाद आखिर इतना चिंतित क्यों हैं हमारे विज्ञानिक! बड़ा है खतरा

तौकते तूफ़ान अरब सागर में पैदा हुआ एक चक्रवाती तूफ़ान था जिसने देश कई कई राज्यों में तबाही मचाई है.. कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र के बाद गुजरात के तट से टकराने वाले इस तूफ़ान को बेहद खतरनाक श्रेणी में रखा गया था..

लेकिन आखिर इस चक्रवात में ऐसा क्या था जिसने वैज्ञानिकों को परेशान कर दिया है. मौसम विभाग में काम करने वाले वैज्ञानिक इस चक्रवाती तूफ़ान के बाद ऐसी आशंका क्यों जाहिर का रहे हैं कि सबकुछ ठीक नही चल रहा है..

दरअसल तौकते अरब महासागर में लगातार पैदा होने वाले चक्रवातों में बीते कुछ सालों में चौथा चक्रवाती तूफान है. तौकते को मिलाकर तीन चक्रवात या तो महाराष्ट्र या गुजरात के तट से टकराए हैं. 2018 में आए चक्रवात मेकानू जो ओमान में टकरा कर रह गया था, 2019 में आया चक्रवात वायु गुजरात के तट से टकराया था, उसके बाद 2020 में आया निसर्ग महाराष्ट्र के तट से टकराया था. तौकते ने भी कई राज्यों मेंतबाही मचाते हुए आखिरकार गुजरात के भावनगर के तट से टकराया.

14 मई को अरब महासागर के दक्षिणपूर्व में कम दबाव का क्षेत्र बनने के बाद 16 मई को ही इसे भयानक चक्रवाती तूफान की श्रेणी में रख दिया गया, जहां इसे अपना रूप भयंकर करने में दो दिन का वक्त लगा वहीं वायु चक्रवात को भयंकर होने में 36 घंटे लगे थे. उसे पहले आये मेकानू  चक्रवात 4 दिन में बहुत भयंकर चक्रवाती तूफान में बदला था. इन सभी में निसर्ग की गति काफी धीमी थी और उसे विकसित होने में 5 दिन लगे थे. यही नहीं 2020 और 2021 में अरब महासागर में आए दोनों ही चक्रवात, जो भंयकर की श्रेणी के थे, मानसून से पहले वाली अवधि में ही आए थे.

वैसे बंगाल की खाड़ी और अरब महासागर में मिला कर हर साल औसतन पांच चक्रवात आते हैं. इनमें से चार बंगाल की खाड़ी में पैदा होते हैं क्योंकि बंगाल की खाड़ी अरब महासागर से ज्यादा गर्म है.लेकिन बीते सालों में देखा जा रहा है कि अरब महासागर भी गर्म होता जा रहा है जिसकी वजह से यहां चक्रवात पैदा होते आ रहे हैं. मौसम विज्ञानी इस घटना हो हलके में लेने के मूड में नही है. अब इसे ग्लोबल वार्मिंग से जोड़ कर देखा जा रहा है.

अब लगातार अरब सागर में पैदा हो रहे चक्रवाती तूफ़ान के कारण मौसम वैज्ञानिक चिंतित है क्योंकि अरब सागर में चक्रवात की संख्या में बढ़ोत्तरी अच्छा संकेत बिलकुल भी नही है.