किसान आन्दोलन के बीच उमर खालिद और शरजील इमाम के पोस्टर क्यों? मचा बवाल

किसान आन्दोलन किसान बिल के विरोध में किया जा रहा है. सरकार से इस बिल को वापस लिए जाने की मांग की जा रही है. समझौते के लिए किसान यूनियन और कृषि मंत्री के बीच कई दौर की बैठक हो चुकी है लेकिन मामला सुलझता अभी तक दिखाई नही दिया. लगातार किसान प्रदर्शन कर रहे हैं और कृषि कानून को वापस लेने की मांग कर रहे हैं हालाँकि किसानों की मांग यही तक सीमित नही है बल्कि किसानों के प्रदर्शन स्थल पर कुछ ऐसे पोस्टर लगाए गये हैं जिससे कुछ जगहों पर किसान खुद घिरते नजर आ रहे हैं.

दरअसल भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) के एक पोस्टर में उमर खालिद, शरजील इमाम समेत अन्य कुछ लोगों के पोस्टर को लेकर आपत्ति जताई गई. लेकिन अब यूनियन की ओर से इसपर सफाई दी गई है. भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) की तरफ से कहा जा रहा है कि “ये सिर्फ हमारे संगठन की ओर से पोस्टर लगाए गए थे. ये सभी बुद्धिजीवी हैं और हमारी मांग है कि जिन बुद्धिजीवियों को जेल में डाला गया है, उन्हें रिहा किया जाए”.  

अब ये भी जानना जरूरी है कि भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) पोस्टर के जरिये जिन लोगों की रिहाई की मांग कर रहा है आखिर कर वे जेल में बंद क्यों है या उनपर केस क्या चल रहे हैं? ये जानना बेहद जरूरी है क्योंकि इनपर चल रहे केस की वजह से ही इनकी छवि टूकड़े-टूकड़े गैंग की बनी. पोस्टर में उमर खालिद, शरजील इमाम, गौतम नवलखा, सुधा भारद्वाज, वरवरा राव जैसे लोगों का नाम लिखा गया और तस्वीर लगाईं है.

दरअसल उत्‍तर-पूर्वी दिल्‍ली में दंगों से जुड़े एक मामले में जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के पूर्व छात्रनेता उमर खालिद (Umar Khalid) गिरफ्तार हुए हैं. इस साल फरवरी में यह हिंसा हुई थी जिसमें 53 लोगों की मौत हुई थी.खालिद को पूछताछ के लिए रविवार को स्‍पेशल सेल के लोधी कॉलोनी वाले ऑफिस में तलब किया गया था. पुलिस के अनुसार, उनके पास खालिद के खिलाफ पर्याप्‍त सबूत हैं. उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर में सब-इंस्‍पेक्‍टर अरविंद कुमार ने एक इन्‍फॉर्मर के हवाले से कहा कि उमर खालिद ने किसी दानिश नाम के शख्‍स और दो अन्‍य लोगों के साथ मिलकर दिल्‍ली दंगों की साजिश रची थी. ऐसा ही आरोप शरजील इमाम पर भी लगा हुआ है.

वहीँ गौतम नवलखा भीमा कोरेगांव केस में जेल में बंद है. अगर  देखा जाये तो जिन एक्टिविस्ट के पोस्टर लगाए गए, उनमें से कई हिंसा भड़काने और राजद्रोह से जुड़े मामलों को लेकर जेल में हैं और अधिकतर कथित टुकड़े-टुकड़े गैंग से ताल्लुख रखते हैं. ऐसे में सवाल ये पूछा जा रहा है कि जो किसान किसान बिल के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं उन्हें इन लोगों से क्या मतलब! जो देशद्रोह के आरोप में जेल में बंद है.

 

ये किसान आंदोलन में उठाई गई कोई नई मांग नहीं है. किसानों ने जब आंदोलन शुरू किया, तो 30 किसान संगठनों ने मिलकर सरकार के सामने चार बड़ी मांगें रखी थीं. देखिए-

# मोदी सरकार अपने लाए तीनों किसान कानून रद्द कर दे.

# नया बिजली अध्यादेश लागू न हो, और 2020 के बिजली बिल माफ हों.

# सरकार का प्रदूषण को कम करने के लिए लाया गया एकतरफा कानून रद्द किया जाए, जिसमें पराली जलाने को लेकर बड़े जुर्माने का नियम बनाया गया है.

# उन किसान नेताओं, स्टूडेंट लीडर, एनआरसी का विरोध करने वालों और एक्टिविस्टों को रिहा किया जाए, जो झूठे केसों में फंसाकर जेल में बंद कर दिए गए हैं.