क्यों ज़रूरी है 29 फ़रवरी, अगर नहीं मनाया लीप ईयर तो धरती पर आएगी ये मुसीबत!

इस साल 29 फरवरी की तारीख को लीप ईयर के रूप में सेलिब्रेट किया जा रहा है.इसी के मद्देनजर Google भी डूडल बनाकर इस खास तारीख का जश्न मना रहा है. तो चलिए इसी कड़ी में हम भी आपको लीप ईयर से जुड़ी कई ऐसी दिलचस्प बता देते है जिनके बारे में शायद आप नही जानते होंगे और आप इसे जरूर जानना चाहेंगे..जैसे लीप ईयर पहली बार कब मनाया गया था..ये कहां से शुरू हुआ था..इसे खास दिन के रूप में सेलिब्रेट करने की वजह क्या है,ऐसी तमाम बातें आपको हम इस वीडियो में बता रहे है..

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लीप ईयर क्या है?

जैसा ही हम जानते है कि हर 4 साल बाद आने वाले वार्षिक कैलेंडर में 365 की बजाय 366(छाछठ) दिन होते हैं, इसे लीप ईयर कहा जाता है. पृथ्वी सूर्य का चक्कर लगाने में 365 दिन और करीब 6 घंटे लगाती है. ऐसा होने से हर चार साल में एक दिन अधिक हो जाता है. और यही वजह है कि हर 4 साल बाद फरवरी महीने में एक दिन अतिरिक्त जोड़कर समय और तारीख में संतुलन बनाने की कोशिश की जाती है..और इसी एक दिन को हम लीप ईयर के रूप में मनाते है..

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लीप ईयर कब से मनाया जा रहा है ?

ईसाई धर्म की मान्यताओं के मुताबिक, ग्रो गोरियन कैलेंडर के शुरू होने के बाद से ही लीप ईयर को काउंट किया जा रहा है. प्रभु यीशु के जन्म से ही ग्रो गोरियन कैलेंडर को सार्वजनिक रूप से अपनाया गया है. अगर लीप ईयर नहीं मनाया जाए तो क्या होगा? समय चक्र के बीच सही तालमेल बैठाने की वजह से लीप ईयर मनाना बेहद जरूरी हो जाता है. पृथ्वी सूर्य का चक्कर लगाने के लिए 365 दिन और करीब 6 घंटे का समय लेती है. इस तरह देखा जाए तो इन्हीं अतिरिक्त 6 घंटों को मिलाकर चार साल में 24 घंटे यानी एक दिन पूरा होता है. अगर इन 6 घंटों को समय चक्र में काउंट न किया जाए तो दुनिया 100 साल बाद 25 दिन आगे निकल जाएगी. इसके बाद वैज्ञानिक मौसम का सही अंदाजा नहीं लगा पाएंगे. यहाँ तक कि पृथ्वी से जुड़ी खगोलीय घटनाओं की भी सही जानकारी नहीं मिल पाऐगी.