आखिर क्यों मनाया जाता है सेना दिवस? कौन थे फील्ड मार्शल केएम करिअप्पा

15 जनवरी को आर्मी डे मनाया जाता हैं. 15 जनवरी 1949 के दिन से ही भारतीय सेना पूरी तरह ब्रिटिश थल सेना से मुक्त हुई थी और जनरल केएम करियप्पा को भारतीय थल सेना का कमांडर इन चीफ बनाया गया था.

सेना दिवस पर बधाई देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट में लिखा, “मां भारती की रक्षा में पल-पल मुस्तैद देश के पराक्रमी सैनिकों और उनके परिजनों को सेना दिवस की हार्दिक बधाई. हमारी सेना सशक्त, साहसी और संकल्पबद्ध है, जिसने हमेशा देश का सिर गर्व से ऊंचा किया है. समस्त देशवासियों की ओर से भारतीय सेना को मेरा नमन.”

वहीँ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने लिखा कि “सेना दिवस पर, भारतीय सेना के वीर पुरुषों और महिलाओं को बधाई. हम उन बहादुरों को नमन करते हैं जिन्होंने राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया. भारत हमेशा साहसी और प्रतिबद्ध सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के लिए आभारी रहेगा. जय हिंद!”

आइये जानते हैं सेना दिवस से जुडी बड़ी बातें!

हर साल 15 जनवरी को सेना दिवस फील्ड मार्शल केएम करिअप्पा के सम्मान में मनाया जाता है. 1949 में आज ही के दिन यानी 15 जनवरी 1949 को जनरल करिअप्पा को भारतीय सेना के कमांडर-इन-चीफ के तौर पर नियुक्त किया गया था. जनरल करिअप्पा पहले भारतीय थे जिन्हें ये पद दिया गया था..

विभाजन के वक्त 1947 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई जंग में जनरल करिअप्पा ने भारतीय सेना की कमान संभाली थी. उस समय कबालियों के भेष में पाकिस्तानी सेना ने कश्मीर में हमला किया था.

1953 में रिटायर होने के बाद भारत सरकार ने करिअप्पा ने ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में उच्चायुक्त बनाया था और उन्होंने 1956 तक अपनी सेवाएं दीं. उन्होंने अपने अनुभव का इस्तेमाल कई देशों की सेनाओं के पुनर्गठन में किया.

जनरल करिअप्पा भारतीय सेना के पहले ऐसे ऑफिसर थे जिन्हें फील्ड मार्शल की रैंक दी गई. भारत सरकार ने उन्हें 1986 में फील्ड मार्शल की रैंक दी थी. यह फाइव स्टार वाला जनरल ऑफिसर रैंक है और भारतीय इतिहास  अभी तक सिर्फ दो ऑफिसर्स को दिया गया है, करिअप्पा और सैम मानेकशॉ को.

आज की बात करें तो वैश्विक स्तर पर भारतीय सेना दुनिया की पांच सबसे शक्तिशाली सेनाओं में है. सैन्य शक्ति के मामले में अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत चौथे स्थान पर आता है.