शहर की तुलना में गांव में क्यों कम फैल रहा है कोरोना? रिसर्च में इस बात का हुआ खुलासा

देश में कोरोना महामारी ने तबाही मचा रखी है..लेकिन इस महामारी के बीच एक बात सबने नोटिस की होगी..कि कोरोना संक्रमण का प्रभाव गांवों में या शहर के निम्न वर्गीय तबके पर बुहत ज्यादा नहीं पड़ा है. जितना की मध्यवर्ग या फिर उच्च वर्ग पर पड़ रहा है. हमारे कहने का ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि गांवों में या फिर शहर के निम्न वर्ग पर कोरोना का असर बिल्कुल ही नहीं पड़ा लेकिन जब उच्च वर्ग और मध्यवर्ग से तुलना किया जाएं तो ये बहुत हद तक कम है! इस बात का खुलासा हाल ही में जारी अमेरिका के एक रिसर्च में भी हुआ है.

Crowd of people in the market on the first day of lockdown exemption in  haldwani

अमेरिका की कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के एक रिसर्च के मुताबिक, जो लोग शारीरिक श्रम नहीं करते हैं या बहुत ही कम करते हैं, उनमें कोरोना का संक्रमण बुहत घातक साबित हो सकता है. जो लोग शरीर से बेहद कम मेहनत करते है ऐसे लोगों को संक्रमित होने पर हॉस्पिटल में भर्ती कराना पड़ता है यानी इनमें संक्रमण का प्रभाव ज्यादा होता है और यही वजह है कि ऐसे मरीजों में मौत का आंकड़ा भी ज्यादा रहा. वहीं शारीरिक मेहनत करने वाले लोग अगर कोरोना से संक्रमित हो भी जाते है तो उन्हें कोरोना का वायरस ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा पाता है और वो जल्दी ठीक भी हो जाते है.

ब्रिटिश जर्नल ऑफ सपोर्ट मेडिसिन में प्रकाशित इस रिसर्च में बताया गया है कि धूम्रपान, मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और कैंसर जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों में भी कोरोना होने पर इसके संक्रमण का गंभीर होने का खतरा है. लेकिन शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं रहने वाले लोगों में संक्रमण का खतरा इन बीमारियों से पीड़ित मरीजों से भी ज्यादा है.

कोरोना वायरस: इटली में लगातार तीसरे दिन सबसे कम मौतें - BBC Hindi

इस रिसर्च में इस बात का भी जवाब मिला है कि गांवों में क्यों कोरोना संक्रमण उतना घातक नहीं है, जितना की शहरों में है. इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह जीवनशैली है. दरअसल गांव के लोगों की जीवनशैली शारीरिक श्रम वाली रही है. जिसके कारण कोरोना का वायरस ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा नुकसान नहीं कर पाया.

कहा जा रहा है कि अमेरिका, ब्रिटेन समेत विकसित देशों में कोरोना का संक्रमण बेकाबू होने की मुख्य वजह यही हो सकती है. क्योंकि जीवनशैली और आधुनिक तकनीक के कारण यूरोपीय, अमेरिका जैसे देशों में लोग ज्यादा शारीरिक मेहनत नहीं करते हैं. जिसके वजह से वहां संक्रमण बेकाबू भी हुआ. अभी हालांकि भारत में भी संक्रमण बेकाबू हो गया है..ऐसे में समझने वाली बात है कि हम सब के लिए शारीरिक मेहनत बहुत जरूरी है.