दशहरा पर नये काम की शुरुआत करना और शास्त्रों का पुजन क्यों?  

हर साल अक्टूबर के महीने में आने वाला दशहरा हिन्दुओ में बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की जीत का पर्व है. माना यह भी जाता है कि इस दिन भगवान श्री राम ने रावण का वध कर लंका पर विजय प्राप्त की थी. भारत में दशहरे को विजय दशमी के नाम से भी जानते हैं. साथ ही यह भी माना जाता हैं कि मां दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस का इसी दिन वध किया था. भारत में दशहरा के दिन शाश्त्रों पूजन करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है.

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दशहरा अश्विन माह की शुक्लपक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है. इस बार 15 अक्टूबर 2021 दिन शुक्रवार को देशभर में ये पर्व मनाया जाएगा. इस दिन विशेष रूप से शस्त्र पूजा की जाती है. दशहरा को विजय दशमी भी कहते हैं. इस दिन मां दुर्गा और भगवान श्रीराम का पूजन होता है. माना यह भी जाता हैं कि इस दिन किए जाने वाले कामों का शुभ फल अवश्य मिलता है. माना यह भी जाता है कि शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए इस दिन शस्त्र पूजा करनी चाहिए.

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परंपरा से जुड़ा इतिहास और क्यों होता है शस्त्र पूजन

दशहरा के महत्व के बारे ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्र ने बताया कि दशहरा हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है. इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर नाम के असुर का वध कर देवताओं को उसके आतंक से मुक्त किया था. इस दिन भगवान श्री राम ने रावण का वध कर माता सीता को उसकी कैद से आजाद कराया था. इस पर्व को बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है. इस दिन सनातन धर्म में शस्त्र की पूजा की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है. इस दिन लोग शस्त्र पूजन के साथ ही वाहन पूजन भी करतें हैं. वहीं आज के दिन से किसी नए कार्य की शुरुआत करना शुभ माना जाता है.

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परंपरा की शुरुआत

ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्र से मिली जानकारी के अनुसार दशहरा किस भी कार्य के लिए शुभ है. प्राचीन समय में क्षत्रिय दशहरे का इंतजार युद्ध पर जाने के लिए किया करते थे. माना जाता हैं कि इस भगवान श्रीराम ने असत्य को परास्त कर जिस तरह से विजय हासिल की थी और मां दुर्गा ने महिषासुर नाम की बुराई का अंत किया था, ठीक  उसी प्रकार दशहरे के दिन जो भी युद्ध या कार्य शुरू होगा, उसमें जीत निश्चित हैं. पहले समय में अक्सर युद्ध पर जाने से पहले शस्त्र पूजन किया जाता था. तभी से ये परंपरा शुरू हुई. वहीं इस दिन को ब्राह्मण विद्या ग्रहण करने के लिए भी चुनते थे.

 

STORY BY – UPASANA SINGH