भारत में चल रहा है कोरोना की 30 वैक्सीन पर काम, क्या देश के स्वास्थ्य मंत्री लगवाएंगे वैक्सीन?

कोरोना वैक्सीन का काम दुनिया भर में तेजी से चल रहा है. भारत भी वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया में किसी देश से कम नजर नहीं आ रहा है. भारत में अभी 30 वैक्सीन का ट्रायल जारी है. ऐसे में देश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बताया है कि जब तक कोरोना की वैक्सीन नहीं बन जाती तब तक कोरोना से कैसे अपना बचाव करें.

Testing 1.3 bn people neither possible nor feasible: Harsh Vardhan, Health  News, ET HealthWorld

डॉ हर्षवर्धन ने कहा कि देश में कोरोना वैक्सीन के निर्माण का काम प्रगति पर है लेकिन जब तक इसकी वैक्सीन नहीं आ जाती, तब तक दो गज दूरी सहित सोशल डिस्टेंसिंग ही वैक्सीन है. दुनिया में कोरोना रोधी 145 टीका ‘प्री क्लिनिकल’ के स्तर पर हैं और इसमें से 35 का क्लिनिकल ट्रायल चल रहा है.

डॉ हर्षवर्धन ने कहा कि भारत में कोरोना की 30 वैक्सीन पर काम हो रहा है. इनमें से 3 वैक्सीन क्लीनिकल ट्रायल के अलग-अलग चरणों में है, जबकि 4 वैक्सीन क्लीनिकल ट्रायल से पहले की अवस्था में हैं.

हर्षवर्धन ने कहा कि वायरस के शोध की दिशा में 2000 से ज्यादा वायरसों की जीनोम श्रृंखला तैयार की गई है. उन्होंने कहा कि कोरोना मामलों के अचानक बढ़ने की मुख्य वजह लोगों का गैरजिम्मेदाराना रवैया है. लोगों ने अनलॉक का गलत मतलब समझा है और पूरी तरह से लापरवाह हो गए हैं.

Trial of Coronavirus Vaccine Made by Moderna Begins in Seattle - The New  York Times

वही खबर आ रही है कि शनिवार को अमीरात के स्वास्थ्य मंत्री अब्दुल रहमान बिन मोहम्मद अल ओवैस ने भी कोरोना वायरस की वैक्सीन लगवाई है. उन्हें वैक्सीन की पहली डोज दे दी गई है.वैक्सीन लगवाने के बाद उन्होंने कहा कि ये वैक्सीन सुरक्षित और प्रभावी है, इसके क्लिनिकल ट्रायल के सकारात्मक नतीजे उत्साह बढ़ाने वाले हैं.

बता दें कि संयुक्त अरब अमीरात के स्वास्थ्य मंत्री ने जिस वैक्सीन की डोज ली है वो चीन की फार्मा कंपनी सिनोफार्म ने विकसित की है. इस वैक्सीन के तीसरे चरण का ट्रायल यूएई में चल रहा है, इसमें 120 देशों के करीब 31 हजार वॉलेंटियर्स शामिल हुए हैं.

वही हाल ही में भारत के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने सोशल मीडिया संडे संवाद प्लेटफॉर्म पर बात करते हुए कहा था कि अगर लोगों को सरकार, वैज्ञानिकों और वैक्सीन से जुड़ी सारी वैज्ञानिक प्रक्रियाओं पर थोड़ा सा भी संदेह होता है, तो वो इस संदेह को दूर करने के लिए और जरूरत पड़ी तो वह सबसे पहले खुद कोरोना की वैक्सीन लगवा लेंगे…ऐसी ही तमाम कोरोना वायरस से जुड़ी अपडेट के लिए हमारे साथ बने रहिए….और पढ़ते रहिए पर्यावरण पोस्ट..