World Day against Child Labour 2021: 20 सालों मे पहली बार दुनिया भर में बाल श्रम में वृद्धि दर्ज

बाल श्रम..ये एक समाज और देश पर ऐसा दाग है जो पूरी दुनिया में उसकी छवि खराब करता है और एक समाज की बहुत सारी समस्याओं को बताता है. हैरान करने वाली बात तो ये है कि अपने देश में तो बाल श्रम व्यापक स्तर पर देखने को मिलता है.

World Day Against Child Labour 2020: जानें कब हुई थी इस दिन की शुरुआत, क्या  है इसे मनाने का महत्व - World day against child labour history and  significance of the day -

क्या है बाल श्रम

बाल-श्रम का मतलब ये है कि जिसमे काम करने वाला व्यक्ति कानून द्वारा निर्धारित आयु सीमा से छोटा होता है.आसान भाषा मे कहें तो इसमें छोटे छोटे बच्चों को मेहनत का काम करवाया जाता है और इसके बदले में उनको कुछ पैसे दिए जाते है. कई जगह बिना भुगतान के ही बच्चों से मजदूरी करवाई जाती है. भारतीय संविधान के अनुसार किसी उद्योग, कल-कारखाने या किसी कंपनी में मानसिक या शारीरिक श्रम करने वाले 5 से 14 वर्ष उम्र के बच्चों को बाल श्रमिक कहा जाता है. छोटे बच्चों को काम करना गैरकानूनी है.

पिछले दिनों एक रिपोर्ट आई है जिसके मुताबित दो दशक यानी 20 सालों में पहली बार ऐसा हुआ है, जब वैश्विक स्तर पर बाल श्रम में वृद्धि दर्ज की गई है. इस रिपोर्ट को जारी किया है अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) और यूनिसेफ ने. इस रिपोर्ट के मुताबिक, बाल मजदूरी को रोकने की दिशा में प्रगति 20 साल में पहली बार रुकी है. जबकि 2000 से 2016 के बीच बाल श्रम में बच्चों की संख्या 9.4 करोड़ कम हुई थी, लेकिन अब ये बढ़ रहा है.

World Day Against Child Labour 2020: विश्व बाल श्रम निषेध दिवस और इसका महत्व

रिपोर्ट के अनुसार ‘दुनियाभर में बाल श्रम में बच्चों की संख्या बढ़कर 16 करोड़ हो गई है. इसमें पिछले चार साल में 84 लाख की वृद्धि हुई है. इसमें जनसंख्या वृद्धि और गरीबी के कारण अफ्रीका में सबसे अधिक वृद्धि हुई है.

रिपोर्ट में बाल मजदूरी में 5 से 11 साल उम्र के बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी की ओर इशारा किया गया है जो पूरी दुनिया में कुल बाल मजदूरों की संख्या की आधे से अधिक है.इसके साथ ही खतरनाक काम करने वालों की संख्या में भी वृद्धि हुई है जो उनके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, बाल श्रमिकों के तौर पर लड़कियों की तुलना में लड़कों की संख्या अधिक है. ग्रामीण क्षेत्रों में बाल श्रम 14 प्रतिशत है, जो शहरी क्षेत्रों में 5 प्रतिशत के आंकड़े से लगभग तीन गुना अधिक है.
रिपोर्ट के मुताबिक, कृषि क्षेत्र में बाल मजदूरी करने वाले बच्चों का आंकड़ा 70 प्रतिशत है, सेवा क्षेत्र में 20 प्रतिशत और उद्योगों में 10 प्रतिशत बच्चे हैं. इसके अलावा 5 से 11 वर्ष के लगभग 28 प्रतिशत बच्चे और 12 से 14 वर्ष की आयु के 35 प्रतिशत बाल श्रमिक, स्कूल से बाहर हैं.

रिपोर्ट मे कहा गया है कि कोरोना के प्रभाव के कारण लाखों और बच्चे बाल श्रम की ओर आने के जोखिम में हैं.’ रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि महामारी के परिणामस्वरूप 2022 के अंत तक वैश्विक स्तर पर 90 लाख अतिरिक्त बच्चों को बाल श्रम में धकेल दिए जाने का खतरा है.

World Day Against Child Labour Special/ बालश्रम हम सबके लिए खतरनाक

गौरतलब है कि हर साल 12 जून को पूरी दुनिया में विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जाता है. इसकी शुरुआत 2002 में अंतरराष्ट्रीय श्रम संघ ने की थी. इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से श्रम न कराकर उन्हें शिक्षा दिलाने के लिए जागरूक करना है. इस साल विश्व बाल श्रम निषेध दिवस की थीम ‘एक्ट नाउ: एंड चाइड लेबर’ यानि ‘अभी सक्रिय हों बाल श्रम खत्म करें’ है. बच्चों को जबरन श्रम में धकेल दिया जाता है, मादक पदार्थों की तस्करी और वेश्यावृत्ति जैसी अवैध गतिविधियों के लिए बच्चों को मजबूर किया जाता है. इस वजह से लोगों को बाल श्रम की समस्या के बारे में जागरूक करने और उनकी मदद करने के लिए इस दिवस को मनाया जाता है.