क्यों माना जाता है विश्व पर्यावरण दिवस? जानें इतिहास और इस साल की थीम

इंसान का जीवन धरती के वातावरण के कारण अस्तित्व में है। हमारे सांस लेने के लिए हवा से लेकर खाने पीने तक की हर जरूरी चीजें वातावरण उपलब्ध कराता है और धरती पर जीने के लिए अनुकूल माहौल देता है।यह सब प्रकृति की देन है। प्रकृति और पर्यावरण से ही ब्रह्मांड सुचारू रूप से चल पाता है। प्रकृति के बिना जीवन संभव नहीं। विश्व के देश आधुनिकता की ओर बढ़ रहे हैं लेकिन इस राह में दिनों दिन दुनियाभर में ऐसी चीजों का इस्तेमाल बढ़ गया है और इस तरह से लोग जीवन जी रहे हैं, जिससे पर्यावरण खतरे में हैं। वातावरण लगातार  दूषित हो रहा है, जिससे कई तरह की समस्याएं बढ़ रही हैं, जो हमारे जनजीवन को तो प्रभावित कर ही रही हैं, साथ ही कई तरह की प्राकृतिक आपदाओं की भी वजह बन रही हैं। ऐसे में प्रकृति को तो नुकसान हो ही रहा है, साथ ही जनजीवन का अस्तित्व भी खतरे में है। ऐसे में हर इंसान का कर्तव्य है कि वह पर्यावरण को सुरक्षित रखने का प्रयास करें। सुखी स्वस्थ जीवन के लिए पर्यावरण का संरक्षण जरूरी है। लोगों को पर्यावरण के प्रति सचेत करने के  उद्देश्य से हर साल  ५ जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। आइये जानते है साल २०२२ की पर्यावरण की थीम और इस दिन को मानाने के पीछे का उदेश्य। 

पर्यावरण दिवस 2022 की थीम

पर्यावरण दिवस पर हर साल एक अलग थीम रखी जाती है। विश्व पर्यावरण दिवस 2022 की थीम ”Only One Earth” यानी केवल एक पृथ्वी है। इस थीम के आधार पर ‘प्रकृति के साथ सद्भाव में रहना’ पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस 2022 की मेजबानी स्वीडन द्वारा की जानी है। 

कब मनाया जाता है विश्व पर्यावरण दिवस

विश्व पर्यावरण दिवस हर साल जून महीने में मनाया जाता है। दुनियाभर के तमाम देश 5 जून को पर्यावरण दिवस मनाते हैं। इस साल भी पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के लिए भारत समेत कई देशों में 5 जून को पर्यावरण मनाया जा रहा है। प्रशासन के साथ साथ निजी संस्थाओ , स्कूलों में व्यक्तिगत रूप से विभिन्न कार्यकर्मो का आयोजन किया जाता है। इस दिन बहुत से लोग पेड़ लगते है या फिर अपने आस पास के नदी, तालाब ,झरने या स्थानों को स्वच्छ रखने का संकल्प करते है और उन्हें स्वच्छ रखने का प्रयास करते है। 

पर्यावरण दिवस मनाने की शुरुआत कब हुई

विश्व पर्यावरण दिवस हर साल 5 जून को मनाया जाता है, यह पर्यावरण के बारे में जागरूकता फैलाने पर समर्पित सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय दिवस है। इसकी शुरुआत संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 1972 में की गई थी, इसे संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के नेतृत्व में वर्ष 1974 से ही आयोजित किया जा रहा है। पर्यावरण दिवस की नींव उस समय रखी गई जब पहली बार 1972 मे स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में एक पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया गया था। जिसमें भारत समेत दुनिया भर के लगभग 119 देशों ने हिस्सा लिया था। हालांकि पहला विश्व पर्यावरण दिवस इसके दो साल बाद 5 जून 1974 को मनाया गया था।

पर्यावरण दिवस मनाने का उद्देश्य

दुनिया में लगातार प्रदूषण बढ़ रहा है। इसी बढ़ते प्रदूषण के कारण प्रकृति पर खतरा बढ़ रहा है। जिसे रोकने के उद्देश्य से पर्यावरण दिवस मनाने की शुरुआत हुई, ताकि लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया जाए और प्रकृति को प्रदूषित होने से बचाने के लिए प्रेरित किया जा सके। दुनिया भर में मनुष्य कार्यकलापों के कारण बढ़ते प्रदूषण और पर्यावरण की क्षति को रोकने के उद्देश्य से ही 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है और इसे मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना भी है।

  • पेड़ों की अंधाधुंध कटाई को रोकना,
  • जैव विविधता को बनाए रखना और विलुप्त होने वाले जीव जंतुओं का संरक्षण करना,
  • लोगों को प्रकृति और पर्यावरण के प्रति सचेत करना,
विश्व पर्यावरण दिवस मनाने की शुरुआत भारत में कब हुई

भारत भी पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर है। पर्यावरण संरक्षण के लिए भारत ने कानून बनाया है। इसके तहत 19 नवंबर 1986 में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम लागू किया गया था। जब पहली बार विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा था तो भारत में भी पर्यावरण दिवस मनाया। उस समय देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थीं, जिन्हें पर्यावरण संरक्षण पर आयोजित कार्यक्रम में प्रकृति के प्रति अपनी चिंताओं को जाहिर किया।