दुनिया में भुखमरी की कगार पर 27 करोड़ लोग, भारत के गेहूं एक्सपोर्ट पर बैन के बीच UN ने की यह अपील

घरेलू बाजारों में आटा की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी पर लगाम लगाने के लिए केंद्र की मोदी सरकार द्वारा गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिए गए है। रूस और यूक्रेन युद्ध की शुरुआत से ही भारत और रूस के द्विपक्षीय रिश्तों और कारोबार पर लगातार उंगली उठाने वाले अमेरिका को अब मोदी सरकार के इस कदम से दुनिया भर में भुखमरी फैलने का डर सता रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बुधवार को कहा कि दुनिया भर में भूखमरी का स्तर एक नई ऊंचाई पर है। उन्होंने दुनिया से इसके खिलाफ लड़ाई का आह्वान किया है। अब उसने उम्मीद जताई है कि भारत गेहूं के निर्यात पर लगाई गई रोक के फैसले पर दोबारा विचार करेगा।

दुनिया भर में बढ़ेगी भुखमरी

भारत की मोदी सरकार की ओर से गेहूं के निर्यात पर रोक लगाए जाने के बाद अमेरिका ने कहा कि वाशिंगटन देशों को निर्यात प्रतिबंधित नहीं करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा कि गंभीर रूप से खाद्य असुरक्षित लोगों की संख्या केवल दो वर्षों में दोगुनी हो गई है। पहले जो संख्या 13.5 करोड़ थी वह अब 27.6 करोड़ हो गई है। उन्होंने कहा कि 2016 के बाद से 500 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि हमने भारत के फैसले की रिपोर्ट देखी है. हम देशों को निर्यात को प्रतिबंधित नहीं करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं. हमें लगता है कि निर्यात पर किसी भी प्रतिबंध से दुनिया भर में भुखमरी बढ़ेगी।

बता दे की भारत ने इस साल गेहू की कम उत्पादन की वजह से गेहू के निर्यात पर रोक लगाने का एलान किया है।

क्यों लगा है बैन

दरअसल भारत में इस बार भीषण लू चलने की वजह से गेहूं के उत्पादन में बड़ी कमी आई है और उसके चलते अभी से ही कीमतों में इजाफा होने लगा है। इसलिए संकट से निपटने के लिए भारत सरकार ने एक्सपोर्ट पर रोक लगाने का फैसला लिया ताकि घरेलू स्तर पर संकट न पैदा होने पाए।

कीमतों को थामने के लिए रोका गेहूं का निर्यात

इस फैसले का मकसद गेहूं और गेहूं के आटे की खुदरा कीमतों को काबू में करना है, जो पिछले एक साल में औसतन 14 से 20 फीसदी तक बढ़ गई है। इसका उद्देश्य पड़ोसी और कमजोर देशों की खाद्यान्न आवश्यकताओं को पूरा करना है। भारत सरकार गेहूं की वैश्विक कीमतों में अचानक आई वृद्धि को स्वीकार करती है, जिससे ‘हमारी और हमारे पड़ोसियों तथा अन्य कमजोर देशों की खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।’

दुनियाभर की चिंताओं पर विचार करेगा भारत

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत लिंडा थॉमस ग्रीनफील्ड ने कहा कि भारत सुरक्षा परिषद में हमारी बैठक में भाग लेने वाले देशों में से एक होगा. हमें उम्मीद है कि वे अन्य देशों द्वारा उठाई जा रही चिंताओं पर ध्यान देंगे और उस स्थिति पर पुनर्विचार करेंगे। बता दें कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक है और देश ने भीषण गर्मी के कारण गेहूं उत्पादन प्रभावित होने की चिंताओं के बीच घरेलू कीमतों को काबू में रखने के लिए गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है।

यूक्रेन पर रूसी हमले से उपजा खाद्यान्न संकट

यूक्रेन और रूस दुनिया के लगभग एक तिहाई गेहूं और जौ का उत्पादन करते हैं और इसके आधे सूरजमुखी तेल का उत्पादन करते हैं। यूएन न्यूज ने बताया कि रूस और बेलारूस पोटाश के दुनिया के नंबर दो और तीन उत्पादक हैं, जो उर्वरक का एक प्रमुख घटक है। यूक्रेन विकासशील दुनिया की भोजन संबंधी जरूरत को पूरा करता था, लेकिन जब से रूस ने महत्वपूर्ण बंदरगाहों को अवरुद्ध करना शुरू किया है, तब से अफ्रीका और मध्य पूर्व में भूख की स्थिति और भी विकट हो गई है।