चीन के मिसाइल परीक्षण से टेंशन में दुनिया, जानें भारत पर इसका असर

इन दिनों चीन की हाइपरसोनिक मिसाइल की चर्चा जोरों पर है. क्योंकि हाल ही में चीन से खबर आई थी की चीन ने हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण किया है. लेकिन चीन ने ऐसी खबरों से खुद को दरकिनार कर लिया है. चीन का कहना है कि यह परीक्षण एक मिसाइल नहीं बल्कि अंतरिक्ष यान था. बावजूद इसके चीन के इस परीक्षण को लेकर पूरी दुनिया भर में एक बहस छिड़ गई है. इस परीक्षण से अमेरिका खुफिया तंत्र तक सकते में आ गया है. लेकिन यहां सवाल उठता है कि आखिर चीन के इस परीक्षण से अमेरिका क्योंफ डरा हुआ है. आखिरकार है क्या ये हाइपरसोनिक मिसाइल और क्या भारत के पास ऐसा कोई हथियार है या नहीं ? क्या है इसकी खासियत. सवाल यह है कि चीन का हाइपरसोनिक परीक्षण क्या हथियारों की नई रेस की शुरुआत है ? क्या भारत भविष्य में ऐसे हथियार की योजना बना रहा है. आइए इन सारी बातों को जानते हैं.

India Successfully Test-Fires Nuclear-Capable K-4 Submarine-Launched Missile  Off Andhra Coast - News Nation English
क्या होती है हाइपसोनिक मिसाइल ?
हाइपरसोनिक मिसाइल ऐसी मिसाइल्स को कहते हैं जो आवाज की गति (343 मीटर/सेकंड) से 5 गुना ज्यादा या उससे भी ज्यादा स्पीड से टारगेट की ओर बढ़ती हैं. यानी आम भाषा में कहे तो ध्वनि की गति से भी 5 गुना ज्यादा स्पीड से चलने वाला हथियार. ये एक घंटे में करीब 6,200 किलोमीटर की यात्रा कर सकती है. न्यूक्लियर वैपन ले जाने में भी हाइपरसोनिक मिसाइल सक्षम है. हाइपरसोनिक हथियार की खासियत होती है कि ये बेहद कम ऊंचाई पर भी उड़ सकता है और बहुत कम हाइट पर भी आम बैलेस्टिक और क्रूज मिसाइल से ज्यादा गति से उड़ान भर सकती हैं. अपनी यात्रा के दौरान ये दिशा भी बदल सकती हैं, यानी आम मिसाइल की तरह ये तय रास्ते पर ही नहीं चलती हैं. आसानी से टारगेट का पीछा कर सकता है, भले ही टारगेट भाग रहा हो. यानी यह पीछा करके अपने निशाने को ध्वस्त कर देता है.
हाइपरसोनिक मिसाइल से परमाणु बम के साथ ही परम्परागत बम भी लॉन्च किया जा सकता है. इससे क्या लॉन्च करना है ये लॉन्च करने वाले देश पर निर्भर करता है. यही, चिंता का कारण है, क्योंकि मिसाइल का इस्तेमाल जिन परिस्थतियों में होगा उस वक्त देश बुरे से बुरे नतीजे वाले विकल्प को ही इस्तेमाल करेगा.
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आखिर चीन के इस परीक्षण से अमेरिका क्यों डरा हुआ है?
16 अक्टूबर को चीन के हाइपरसोनिक मिसाइल टेस्ट करने की खबर मीडिया में सामने आई. हालांकि, दावा किया गया कि ये टेस्ट फेल रहा. वहीं, दूसरी ओर चीन ने इस तरह के टेस्ट से इनकार कर दिया. इसके बाद भी चीन की इस कोशिश से अमेरिकी खुफिया एजेंसियां हैरान हैं. अमेरिका ने पहले इस परीक्षण की पुष्टि नहीं की थी, लेकिन अब मान लिया है.
चीन या ये टेस्ट भले ही फेल हो गया हो, लेकिन इससे चीन के हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक विकसित करने के करीब पहुंचने की पुष्टि हो गई है. इस टेस्ट को चीन ने पूरी तरह गोपनीय रखा है. हालांकि हाइपरसोनिक मिसाइल डेवलप करने की क्षमता रखने वाला चीन इकलौता देश नहीं है. 2020 में अमेरिका ने हाइपरसोनिक मिसाइल के प्रोटोटाइप का सफल परीक्षण करने का ऐलान किया. रूस के पास हाइपरसोनिक हथियारों की सबसे अत्याधुनिक तकनीक मौजूद है. इसके अलावा जो देश इन हथियारों को विकसित कर रहे हैं, वो हैं- भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी और उत्तर कोरिया.
भारत हाइपरसोनिक ग्लाइडर हथियार बना रहा है, उसका परीक्षण भी कर चुका है. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने मानव रहित स्क्रैमजेट का हाइपरसोनिक स्पीड फ्लाइट का सफल परीक्षण साल 2020 में किया था. उम्मीद है कि जल्द ही भारत हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी के डेवलपमेंट के काम को पूरा कर लेगा.