World Milk Day 202: दुनियाभर में दूध उत्पादन के मामले में भारत नंबर वन पर

दुनिया भर में दूध उत्पादन के मामले में भारत पहले नंबर पर है. विश्व में भारत अकेले 22 फीसद दूध का उत्पादन कर नंबर एक पर बना हुआ है. हमारे देश में दुधारू पशुओं की संख्या तीन सौ मिलियन है जो करीब दो सौ नौ मिलियन टन वार्षिक दूध देते हैं. आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2018 के आंकड़ों के मुताबिक भारत का डेयरी उद्योग सालाना 5.6 फीसदी की दर से बढ़ रहा है. साल 2018-19 में भारत ने 188 मिलियन टन दूध का उत्पादन किया था, जबकि 2019-20 में 198 टन दूध का उत्पादन हुआ. 2020-21 के लिए ये आंकड़ा 208 मिलियन टन तय किया गया था.

World Milk Day 2021: The story of how India went from being milk deficient  to largest dairy producer - The Financial Express

गौरतलब है कि देश में जितनी तेजी से डेयरी उत्पादों की खपत में इजाफा हुआ, उतनी ही तेजी से दूध की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ रही है. यही वजह है कि दूध की गुणवत्ता कम होने के कारण विदेशी बाजारों में हमारे दुग्ध पदार्थों की कीमत कम लगाई जाती है. भारत में दुग्ध उत्पादन में स्वच्छता के बुनियादी मानकों का पालन नहीं किया जाता. वहीं, कीटाणुओं और जीवाणुओं के कारण 68.5% दूषित दूध की आपूर्ति होती है. बता दें कि भारत में 80 फीसदी से ज्यादा तरल दूध की खपत होती है, लेकिन इसके प्रोसेसिंग पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता.

एक और जहां देश में दूध का व्यवसाय लगातार बढ़ रहा है, वहीं उसमें बैक्टीरिया का लोड भी बढ़ता देखा गया है. चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के दिलीप नगर कृषि विज्ञान केंद्र ने इस पर शोध किया है. इसके मुताबिक कम से कम पांच फीसद दूध में बैक्टीरिया होता है. दुधारू पशु और दूध निकालने वाले की स्वच्छता से दूध को बैक्टीरिया मुक्त रखा जा सकता है. अगर जरा सी सावधानी बरती जाएं तो दुग्ध उत्पादन में स्वच्छता का ध्यान रखा जा सकता है और इस व्यवसाय से जुड़े लोग अधिक मुनाफा कमा सकते है.

दुनियाभर में हर साल एक जून को वर्ल्ड मिल्क डे मनाया जाता है. इसकी शुरुआत संयुक्त राष्ट्र ने साल 2001 में की थी. इस दिन को मनाने का मुख्य वजह दूध को वैश्विक भोजन के रूप में मान्यता देना है. साथ ही इस दिन का मकसद प्राकृतिक दूध के सभी पहलुओं के बारे में आम जनता के बीच जागरूकता बढ़ाना है. शरीर के विकास में दूध का महत्व काफी ज्यादा है. इस बात को लोगों तक पहुंचाने के लिए इस दिन को विशेष रूप से मनाया जाता है. इसके अलावा डेयरी या दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में स्थिरता, आजीविका और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना भी है.

हर साल दुग्ध दिवस की थीम तय की जाती है, जिसका मकसद दूध तक लोगों की पहुंच आसान बनाना होता है. इस साल विश्व दुग्ध दिवस की थीम पर्यावरण, पोषण व सामाजिकआर्थिक सशक्तिकरण के साथ डेयरी क्षेत्र में स्थिरता पर केंद्रित है.