World Rabies Day: रेबीज से हर साल हजारों लोगों की मौत, कुत्ता पालते है तो हो जाएं सावधान

कुत्ता एक ऐसा जानवर है जिसे ज्यादातर लोग पालते है या पालना चाहते है…लेकिन, आपको कुत्तों की एक सच्चाई जानने के बाद इनसे डर लगने लगेगा. जी हां कुत्तों के काटने से होने वाली रेबीज बीमारी से हर साल औसतन 60 हजार लोगों की मौत हो जाती है. ऐसे कई सारे आंकड़े है जो ये बत्ताते है कि कुत्ते के काटने पर कभी भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए नहीं तो आप रेबीज के शिकार हो सकते हैं.

आप सोच रहे होंगे की आज रेबीज बीमारी के बारे में बात क्यों कर रहे है तो बता दें कि हर साल आज ही के दिन 28 सितंबर को वर्ल्ड रेबीज डे मनाया जाता है. यह दिवस रेबीज की रोकथाम के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इस भयानक बीमारी को हराने के उद्देश्य से मनाया जाता है. रेबीज दिवस का उद्देश्य वर्ष 2030 तक इस बीमारी को खत्म करना है रेबीज की बीमारी एक विषाणु से होती है, खासकर कुत्ते के काटने से और इसका कोई इलाज नहीं है. लेकिन अगर इस बीमारी के होने से पहले जरूरी सावधानियां और इलाज लिया जाए तो इससे बचा जा सकता है.

रेबीज सेंट्रल नर्वस सिस्टम की घातक वायरल बीमारी है. रेबीज शब्द का अर्थ है ‘पागलपन’. ये आमतौर पर कुत्तों और जंगली मांसाहारी जानवरों के काटने से फैलती है. मानव में रेबीज के फैलने का मुख्य स्रोत कुत्ते है. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, भारत में हर साल तकरीबन 20,000 रेबीज से मौतें होती हैं. रेबीज से दूर रहने के लिए जानवरों में रेबीज के लक्षण को पहचानने की जरूरत है.

जानवरों में रेबीज के लक्षण

-बिना छेड़खानी के ही लोगों को काटने के लिए हमेशा दौड़े यानी जब अपने आप झपटने और काटने की आदत आ जाए

– जानवर जब लकड़ी, घास या अन्य वस्तुओं को भी काटने लगे

– कुत्ता जब फटी सी आवाज में भौंकता है अर्थात् उसकी पहले वाली आवाज बदल जाती है

– सांस लेने के लिए तेज हांफना

-जानवरों के मुंह से हमेशा लार टपकता रहना

-जानवर बेचैन दिखने लगे, जानवार की आंखे लाल रहने लगे

जानवरों में जब ऐसे लक्षण दिखाई देने लगे तो उपचार जरूरी है. इंसानों में रैबीज के लक्षण कुत्ता काटने के दस साल बाद भी हो सकता है. इंसानों में इसके लक्षण क्या है आईए ये भी जान लेते है…

पीड़ित में रेबीज के लक्षण

– कुत्ते के काटने के बाद चिड़चिड़ापन महसूस होना

– बुखार आना

– मुंह से लार निकलना

– मासंपेशियों में जकड़न महसूस होना

– खाना पानी निगलने में दिक्कत होने लगे

-सांस लेने में तकलीफ होने लगे तो यह रैबीज के लक्षण हो सकते हैं.

कुछ लोगों को इस बात की जानकारी नहीं है कि कुत्ते के काटने के बाद सबसे पहले क्या करना चाहिए. लोग घबराकर आनन-फानन में गलत कदम उठा लेते हैं. आपको यह जानना बहुत जरूरी है कि कुत्ते के काटने के बाद सेकंड, मिनट या घंटों में क्या करना चाहिए. तो चलिए जानते है…

यदि बंदर या कुत्ता काट ले तो तत्काल उस जगह को साबुन या एंटीसेप्टिक लोशन से अच्छी तरह साफ कर लें. कटे हुए घाव पर भूलकर भी कपड़ा ना बांधे. घाव खुला रखें. इसके बाद डॉक्टर से संपर्क करें और इन्फेक्शन से बचने के लिए पहला इंजेक्शन लगाएं. सबसे जरूरी बात ये है कि अगर संभव हो तो पता लगाने की कोशिश करें कि रेबीज वाले कुत्ते या किसी अन्य जानवर ने तो नहीं काटा है. क्योंकि रेबीज वाले कुत्ते के काटने से आप भी रेबीज का शिकार हो सकते हैं. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक, रेबीज का कोई इलाज नहीं है और रेबीज में पांच से छह दिन में मौत हो जाती है. इसलिए कुत्ते के काटने के बाद कुछ दिनों तक उस कुत्ते पर नजर रखें अगर कुछ ही दिनों में उसकी मौत हो जाती है, तो समझ लें कि आपकी जिंदगी खतरें में है. रेबीज के लक्षण ज्यादातर मामलों में तीन महीनों के भीतर नजर आने लगते हैं, लेकिन कुछ दुर्लभ मामलों में कई वर्षों बाद भी ये बीमारी हो सकती है.

डॉक्टरों के अनुसार कुत्ता या बंदर काट ले तो तुरंत ईलाज करा लेना चाहिए. जितनी जल्दी हो सके वैक्सीन या एआरवी के टीके लगवाए. तभी जानलेवा बिमारी रेबीज से बचा जा सकता है.