आर्थिक मंदी की कगार पर दुनिया, ये 5 कारण जिम्मेदार

एक बार फिर से वैश्विक अर्थव्यवस्था का  आर्थिक मंदी की चपेट में आना लगभग तय है। दुनिया भर में एक बार फिर से आर्थिक मंदी (Recession) का खतरा मंडराने लगा है। दुनिया  के सबसे आमिर व्यक्ति एलोन मस्क समेत दुनिया

भर के सभी अर्थशास्त्रियों की नींद ख़राब हो चुकी है। दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों का मानना है की इस समय दुनिया के सबसे अमीर और विकसित  देश जैसे की अमेरिका आज मंदी के कगार पर खड़े है। क्या है ऐसी वजह जिस से आज दुनिया फिर से आर्थिक मंदी के कगार पर खड़ी है। 

रूस-यूक्रेन युद्ध

फरवरी के अंतिम सप्ताह से रूस और यूक्रेन युद्ध में उलझे हुए हैं। जहा पहले माना जा रहा था की ये युद्ध लम्बा नहीं चलेगा और यूक्रेन कुछ ही दिनों में रूस की सैन्य शक्ति के आगे घुटने टेक देगा वही सभी की आशाओ के विपरीत यह येध पिछले कुछ महीनो से आज भी चल रहा है। इस युद्ध के कारण दुनिया भर में कई जरूरी कमोडिटीज की कमी का संकट उत्पन्न हो गया है. रूस और यूक्रेन दोनों ही गेहूं और जौ जैसे कई अनाजों के बड़े निर्यातककों में से है. युद्ध के चलते इनका निर्यात प्रभावित हुआ है. अभी हालात ऐसे हैं कि कई देशों के सामने फूड क्राइसिस की स्थिति है।

कोरोना महामारी

साल 2019 से  पूरी दुनिया कोरोना महामारी की मार झेल रही है। कोरोना की वजह से दुनिया भर में हेल्थ क्राइसिस से ज्यादा इकोनॉमिक क्राइसिस पैदा हुआ है। एक बार फिर से चीन इस महामारी की चपेट में आ गया है। चीन के शंघाई जैसे बड़े शहर में फिर से सम्पूर्ण लॉक डाउन लग गया है जिस वजह से कई कंपनियों के प्लांट फिर से बंद हो गए हैं. पहले से ही सप्लाई चेन की दिक्कतों का सामना कर रही दुनिया के लिए इस नई लहर ने सप्लाई साइड की समस्या को और विकराल बना दिया है।

महंगा होता कर्ज

महंगाई को कंट्रोल करने के लिए दुनिया भर के सेंट्रल बैंक लगातार ब्याज दरें बढ़ा रहे हैं। जहा भारत में रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को 0.40 फीसदी बढ़ा दिया वही अमेरिका में फेडरल रिजर्व भी आक्रामक तरीके से ब्याज दरें बढ़ा रहा है।

दशकों की सबसे ज्यादा महंगाई

काफी समय से महंगाई खबरें सुर्ख़ियों में नहीं थी, लेकिन अब फिर से पुराना दौर लौट रहा है। भारत में थोक महंगाई और खुदरा महंगाई दोनों ही कई साल के हाई लेवल पर पहुंच चुकी हैं। अप्रैल में अमेरिका में खुदरा महंगाई कुछ कम होकर 8.3 फीसदी पर आई, लेकिन यह अभी भी कई दशकों के उच्च स्तर पर है. इससे पहले मार्च में अमेरिका में महंगाई की दर 8.5 फीसदी रही थी, जो बीते 41 साल में सबसे ज्यादा था।

क्रूड ऑयल में उबाल

पिछले कुछ महीनो से कच्चे तेल की कीमतों में टाफी तेजी से उछाल आया है। कच्चा तेल अभी भी 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर ही बना हुआ है। दरअसल क्रूड ऑयल के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक रूस के ऊपर अमेरिका व अन्य यूरोपीय देशों ने कई प्रतिबंध लगा दिए हैं. इनमें रूसी तेल व गैस पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। दूसरी ओर ओपेक देश भी तय मानक से कम उत्पादन कर रहे हैं. महंगे क्रूड ऑयल से भारत व चीन जैसे उन विकासशील देशों को नुकसान हो रहा है, जो कच्चा तेल के आयात पर निर्भर हैं।