World Sparrow Day 2021: विश्व गौरैया दिवस आज, क्या अब आप गौरेया को कभी नहीं देख पाएंगे?

एक समय था जब हमारे घरों के आंगन में गौरेया पक्षी की चहचहाहट सुनाई देती थी, लेकिन ये अब नजर नहीं आते. एस स्टडी के मुताबिक, इनकी संख्या में 60 फीसदी तक कमी आई है. ऐसे में इस पक्षी के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के मकसद से ‘विश्व गौरैया दिवस’ मनाया जाता है. ये हर साल 20 मार्च को मनाया जाता है. ऐसे में आज दुनिया भर में ‘विश्व गौरैया दिवस’ मनाया जा रहा है. सबसे पहले 2010 में इस दिन को मनाने की शुरुआत की गई थी. विश्व गौरैया दिवस मनाने का एक उद्देशय यह भी है कि हमारे युवा और प्रकृति के प्रति उत्साही लोगों को गौरैया से प्रेम करने और उनकी देखभाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए.

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गौरैया का वैज्ञानिक नाम पासर डोमेस्टिकस(Passer Domestic) और सामान्य नाम हाउस स्पैरो है. इसकी ऊंचाई 16 सेंटीमीटर और विंगस्पैन 21 सेंटीमीटर होते हैं. गौरैया का वजन 25 से 40 ग्राम होता है. गौरेया हमारी फसलों को भी कीड़ों से बचाती है. ये उन कीड़ों को खा कर उनका सफाया कर देती है, जो फसलों को नुकसान पहुंचाते है. इन्हें शहरों की तुलना में गांवों में रहना ज्यादा है.

अक्सर हम सब ने बचपन में अपने घर के आंगन और छत्तों में गौरैया को फुदकते देखा है. मगर अब ये जैसे गायब ही हो गई है. ऐसे में इन्हें फिर से अपने आंगन और छत्तों पर वापस बुलाने के लिए अपने घर की छत पर दाना, पानी रखें और घर के आस-पास पेड़-पौधे लगाएं, क्योंकि यही गौरैया का प्राकृतिक परिवेश है. गौरैया को बचाने के लिए आप मार्केट में बने आर्टिफीशियल घोंसले भी लाकर घर की छत पर रख सकते हैं.

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दरअसल गौरैया को बचाना खुद को बचाने जैसा है. क्योंकि तेजी से विलुप्त होती गौरैया इस बात का संकेत देती है कि हमारे पर्यावरण का संतुलन काफी तेजी से बिगड़ रहा है. ऐसे में हमें इसके संरक्षण के लिए मिल कर आगे आना होगा और इन्हें बचाने के उपाय करने होंगे…नहीं तो वो दिन दुर नहीं जब गौरेया पूरी तरह से विलुप्त हो जाएंगी….