World Water Day : कहाँ मिलता है सबसे शुद्ध साफ़ पानी? कहाँ पानी के लिए चलना पड़ता है आधा घंटा

हर साल 22 मार्च वर्ल्ड वाटर डे यानि की विश्व जल दिवस के रूप में मनाया जाता है लेकिन क्या आपको थोडा भी अंदाजा है कि विश्व में वे कौन सी जगहें हैं जहाँ पीने का पानी सबसे शुद्ध मिलता है. दुनिया का सबसे ताकतवर देश अमेरिका भी शुद्ध पानी के मामले में पीछे हैं तो इस लिस्ट में सबसे अव्वल कौन है आइये यही जानते है.

सबसे पहले नंबर आता है न्यूजीलैंड : पूरी दुनिया में न्यूजीलैंड के पानी को बहुत सुरक्षित माना जाता है. नल के पानी को शुद्ध करने के लिए न्यूज़ीलैंड का अपना एडवांस फिल्ट्रेशन सिस्टम है. पीने के पानी को 95% तक बेहतरीन क्वालिटी का बनाने के लिए 1995 में न्यूज़ीलैंड ने लक्ष्य बनाया था और 2015 में इस देश ने यह लक्ष्य हासिल भी किया था.

दूसरा नाम है स्वीटज़रलैंड : स्वीटज़रलैंड के नलों में सबसे शुद्ध पानी मिलने के पीछे भौगोलिक संपन्नता के साथ ही बेहतरीन नीति भी वजह है. स्विटज़रलैंड में नल के पानी की क्वालिटी मिनरल वॉटर जैसी बताई जाती है और यह भी कि यहां पानी को ट्रीट नहीं किया जाता इसलिए पानी में केमिकल्स भी नहीं होते. यहां 40% पानी कुदरती जलस्रोतों, 20% भूमिगत और बाकी 20% पानी शुद्ध झीलों से मिलता है. आबादी की ज़रूरत से ज़्यादा यहां शुद्ध पानी बारिश और ग्लेशियरों के ज़रिये उपलब्ध है.

नार्वे : नार्वे में 5% ज़मीन पर 4,55,000 झीलें हैं, 25% ज़मीन पर चार बड़ी नदियां हैं0.7% क्षेत्र यानी करीब 2600 वर्ग किलोमीटर में ग्लेशियर हैं. नॉर्वे में 90% नल का पानी इन्हीं कुदरती सतही जलस्रोतों से मिल जाता है और बाकी 10% भूमिगत पानी नलों में आता है.
आइसलैंड : आइसलैंड 95% पानी ऐसा है, जो कभी प्रदूषण के संपर्क में रहा ही .8100 वर्ग किलोमीटर के दायरे में ग्लेशियर फैले हुए हैं. पीने का 5% पानी अन्य जलस्रोतों से लिया जाता है. मतलब आइसलैंड का पानी कम प्रदूषित है.

जर्मनी : जर्मनी में पीने का करीब 69% पानी ज़मीन के अंदर के रिज़र्वायरों से लिया जाता है, जो मिनरल वॉटर क्वालिटी का होता है. यह पानी आइस एज के समय के जलस्रोतों का बताया जाता है, जिसे बगैर किसी ट्रीटमेंट के सीधे पिया जा सकता है. पानी की बाकी डिमांड नदियों से और 16% आपूर्ति आर्टिफिशियल रिचार्ज वॉटर से होती है.
इनके अलावा स्वीडन, डेनमार्क, ऑस्ट्रिया, फिनलैंड, सिंगापुर और कनाडा जैसे देशों में भी नल का पानी बढ़िया क्वालिटी का आता है. अब बारी है सबसे खराब पानी वाले देशों की
मेक्सिको की आधे से ज़्यादा आबादी पैकेज्ड वॉटर का इस्तेमाल करती है. कोंगो में सिर्फ 21% लोगों को अपने रहने की जगह पर पानी मिल पाता है. भूटान में केवल एक तिहाई लोगों को बगैर प्रदूषण का पानी नसीब होता है. कंबोडिया , नाईजीरिया इथोपिया में पाने के पानी की स्थिति खराब है. यूगांडा में पीने लायक पानी के लिए 40 फीसदी लोगों को आधे घंटे चलकर जाना होता है.

अब भारत की स्थिति क्या है?

नीति आयोग के वॉटर मैनेजमेंट इंडेक्स ने माना था कि 70 फीसदी भारत में जो पानी सप्लाई किया जाता है, वह दूषित होता है. वॉटरएड ने उसी साल जो वॉटर क्वालिटी इंडेक्स जारी किया था, उनमें 122 देशों की लिस्ट में भारत का नंबर 120वां था. भारत में केवल 35 प्रतिशत लोगों के घरों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध है। देश की 42.2 प्रतिशत आबादी को पानी लेने के लिए लगभग आधा किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। देश के लगभग 22 प्रतिशत लोग पानी लाने के लिए आधा किलोमीटर से तीन किलोमीटर दूर तक जाने को मजबूर हैं। देश के बारह करोड़ लोगों को पीने के लिए स्वच्छ पानी उपलब्ध नहीं है। हमारे देश में विश्व के कुल शुद्ध जल का 4 प्रतिशत ही मौजूद है, जबकि हमारे देश में विश्व की 7 प्रतिशत जनसंख्या रहती है।