आखिर कितनी मैली थी यमुना? पीने लायक तो छोडिये अभी सिर्फ नहाने लायक साफ़ हुआ है नदी का पानी

लॉकडाउन के बाद यमुना नदी के पानी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है. यमुना नदी में ऑक्सिजन लेवल बढ़ गया है.. जिसका फायदा इंसानों को तो होता ही है लेकिन इसके साथ ही पानी में रहनेवाले जीवों को भी इसका फायदा होता है. दिल्ली पलूशन कंट्रोल कमिटी ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि यमुना का पानी साफ़ हो चुका है.. अब यमुना का पानी नहाने लायाक हो गया है.. सुनकर थोड़ा अजीब जरूर लग रहा होगा कि यमुना का पानी नहाने लायक? लेकिन सच्चाई तो यही है कि अभी तक यमुना का पानी नहाने लायाक भी नही था.. तो सोचिये कितनी मैली थी यमुना..

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यमुना और उसमें गिर रहे नालों का पानी इन दिनों पहले के मुकाबले काफी साफ हुआ है जिसका सीधा फायदा नदी को मिल रहा है. इसकी पुष्टि  दिल्ली पलूशन कंट्रोल कमिटी की तरफ से होने के बाद अब ये रिपोर्ट यमुना मॉनिटरिंग कमिटी को दे दी गयी है, जिसे एनजीटी ने अपाइंट किया था. जो रिपोर्ट तैयार की गयी है उसमें जो सबसे सकून देने वाली बात है वो ये है कि यमुना नदी में लॉकडाउन की वजह से बायोलॉजिकल ऑक्सिजन डिमांड (BOD) बढ़ गया है. अब यह बढ़कर 33 प्रतिशत है. सिर्फ खजूरी इलाके के पास यमुना में पलूशन लेवल (42 प्रतिशत) बढ़ा हुआ मिला है। कमिटी ने 9 पॉइंट्स और 20 अलग-अलग नालों से सैंपल लिए थे। पाया कि पानी काफी स्तर तक साफ है लेकिन अभी भी कुछ हद तक गंदगी है। इसकी वजह से घरेलू सीवर का पानी नदी में गिरना। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि   आज निश्चित रूप से गंगा साफ है। दुनिया में पानी साफ करने के जो 4 पैमाने हैं उसमें गंगा तीन पैरामीटर पर खड़ी उतरी है। वहीं यमुना नदी का पानी भी स्वच्छ हुआ है। लॉकडाउन के दौरान बरसात हुई थी उससे भी पानी साफ हुआ है। निश्चित रूप से गंगा और यमुना के पानी में सुधार हुआ है लेकिन इसका कारण केवल उधोग बंद होना नहीं है।

दरअसल एक अधिकारी के मुताबिक, इन दिनों लॉकडाउन के अलावा यमुना नदी में पॉल्युशन घटने की वजह ज्यादा पानी छोड़ा जाना भी है। मार्च महीने में अच्छी खासी बारिश हुई है, जिसके बाद पिछले साल के मुताबिक, इस बार नदी में ज्यादा पानी छोड़ा जा रहा है। इस समय इंडस्ट्रियल नाले पूरी तरह से बंद हैं। लेकिन अब भी नदी में घरेलू नाले का पानी आ रहे है, जो कि एक बड़ी समस्या है। उन्होंने कहा कि अगर इसी तरह नाले इसी नदियों में गिरते रहे तो हम पानी के स्तर को नहीं बढ़ा पाएंगे। हालाँकि  फैक्ट्रियों का रसायनयुक्त पानी बंद होने से हिडन तथा यमुना नदियां निर्मल होने लगीं। इससे भूजल प्रदूषित होने पर ब्रेक लगने से यमुना के किनारे बसे 75 गांवों की सेहत सुधरने लगी है। बेशक नदियों का पानी अभी इंसानों के पीने लायक न हुआ हो, लेकिन जलीय जीवों को जीवन दान देने और सिचाई लायक साफ हो गया है।

चार दशक पहले तक हिडन, कृष्णा व यमुना नदियों में कल-कल बहता पानी इतना निर्मल था कि लोग पीने से नहीं हिचकते थे। दो माह पूर्व तक नदियों का पानी इतना जहरीला था कि पीना तो दूर, किनारे बसे गांवों का भूजल प्रदूषित होने से लोग कैंसर जैसी घातक बीमारियों की चपेट में आकर दम तोड़ने लगे। अब ऐसी कई जगहे हैं जहाँ नदी अब पहले जैसी दिखने लगी है.