साफ हुआ यमुना का पानी, सिर्फ लॉकडाउन ही नही ये भी है बड़ी वजह!

कोरोना वायरस के चलते जहाँ फक्ट्रियां बंद है, गाड़ियां सडकों पर नही दौड़ रही है, जिसका असर पर्यावरण पर पड़ रहा है और हमारा पर्यावरण साफ़ और स्वच्छ हो रहा है. दिल्ली से होकर बहाने वाली यमुना नदी पर इसका बड़ा प्रभाव पड़ता दिखाई दिया है. हालाँकि ताजा आकड़ो के सामने आने के बाद ये बात सामने आई है कि यमुना के पानी की गुणवत्ता में सुधार की वजह सिर्फ लॉकडाउन नही है.

दरअसल दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी(डीपीसीसी) ने अपनी एक रिपोर्ट में कही है. यह रिपोर्ट कमेटी ने एनजीटी द्वारा नियुक्त यमुना मॉनिटरिंग कमेटी को सौंपी है. इस कमेटी ने बताया है कि नदी की बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड(बीओडी) में 33 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. कमेटी ने अपने आकलन में लॉकडाउन अवधि की तुलना पिछले साल के अप्रैल माह से की है। डीपीसीसी ने यमुना के नौ जगह से और 20 नालों से भी पानी का सैंपल लिया. डीपीसीसी ने बताया है कि औद्योगिक कचरे के बंद होने से और पानी के बहाव की वजह से नदी इतनी स्वच्छ है. हालांकि डीपीसीसी ने ये भी कहा कि भले ही नदी के पानी की. गुणवत्ता में सुधार हुआ है लेकिन अब भी यह मानकों पर खरा नहीं उतरता क्योंकि नदी में अब भी घरेलू नालों का पानी जा रहा है.

ओखला बैराज पर बीओडी के लिहाज से प्रदूषण देखें तो इसमें 18 प्रतिशत की कमी आई है, वहीं निजामुद्दीन ब्रिज पर 20 प्रतिशत की, आगरा कैनाल जो ओखला बैराज पर स्थित है वहां तो प्रदूषण में 33 प्रतिशत की कमी आई है. जबकि आईटीओ पुल पर 21 प्रतिशत और कुदसिया घाट पर 4 प्रतिशत प्रदूषण की कमी आई है.

वहीँ एक अधिकारी का कहना है कि इस समय नदी में प्रदूषण घटने की वजह लॉकडाउन के अलावा ज्यादा पानी छोड़ा जाना भी है. मार्च में बारिश अच्छी हुई, जिसकी वजह से पिछले साल की तुलना में इस बार ज्यादा पानी नदी में छोड़ा जा रहा है. औद्योगिक नाले पूरी तरह से रुक गए हैं, लेकिन घरेलू नाले अब भी पानी में आ रहे हैं जो बड़ी समस्या हैं। यह साफ है कि अगर नाले इसी नदियों में गिरते रहे तो हम पानी के स्तर को नहीं बढ़ा पाएंगे.

रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि जहां 2019 अप्रैल में 1000 क्यूसेक पानी नदी में छोड़ा गया था वहीं इस महीने नदी में 3900 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है. यही वजह है कि नदी और भी साफ हुई है. अगर नालों की बात करें कि कहां से कितना प्रदूषण नदी में गिरता है तो दिल्ली के सिविल मिल ड्रेन से(80 प्रतिशत प्रदूषित पानी), आईएसबीटी से 68 प्रतिशत, बारापुल्लाह नाले से 32 प्रतिशत प्रदूषित पानी नदी में गिरकर इसे गंदा करता है.